इस अवसर पर समग्र शिक्षा निदेशक राजेश शर्मा ने शिक्षकों का आह्वान किया कि वे अपनी दैनिक शिक्षण प्रक्रिया में जीवन कौशल को प्रभावी रूप से समाहित करें। उन्होंने कहा कि लाइफ स्किल पाठ्यक्रम लागू करते समय विशेष ध्यान रखा गया है कि शिक्षकों पर किसी प्रकार का अतिरिक्त शैक्षणिक भार न पड़े। यह पहल मौजूदा पाठ्यक्रम के साथ समन्वित रूप में विकसित की गई है, ताकि इसे सहज और व्यवहारिक रूप से कक्षा शिक्षण का हिस्सा बनाया जा सके। इस पाठ्यक्रम को तैयार करने से पूर्व पूर्व में संचालित विभिन्न पहलों और अनुभवों का समेकन किया गया है, जिससे इसे अधिक उपयोगी और प्रभावशाली स्वरूप दिया जा सके। उन्होंने शिक्षकों से कहा कि वे इस प्रशिक्षण से प्राप्त ज्ञान, दृष्टिकोण और गतिविधियों को अपने-अपने जिलों में अन्य शिक्षकों तक पहुंचाने की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभाएं।
जीवन कौशल को व्यवहार और सोच में उतारें : राजेश शर्मा ने शिक्षकों से कहा कि वे जीवन कौशल की अवधारणा को केवल पाठ्य सामग्री तक सीमित न रखें, बल्कि इसे विद्यार्थियों के व्यवहार, संवाद और सोच में भी उतारने का प्रयास करें।
उन्होंने कहा कि पाठ्यक्रम के क्रियान्वयन की समय-समय पर समीक्षा की जाएगी और यदि कहीं कोई कमी या अंतराल पाया गया तो उसे दूर करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। राजेश शर्मा ने कहा कि भारती एयरटेल फाउंडेशन ने समग्र शिक्षा के विभिन्न क्रियान्वयन सहयोगियों के साथ प्रभावी समन्वय स्थापित कर इस पाठ्यक्रम को अंतिम रूप देने में सराहनीय भूमिका निभाई है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह कार्यक्रम विद्यार्थियों को भावनात्मक रूप से सुदृढ़, लचीला और आत्मविश्वासी बनाएगा। भारती एयरटेल फाउंडेशन के समीर शाह ने कहा कि इस पहल को इसे वर्तमान शिक्षण प्रक्रिया के साथ समन्वित करते हुए लागू किया जाएगा। और कार्यान्वयन के दौरान आने वाली चुनौतियों का निरंतर मूल्यांकन किया जाएगा और समय-समय पर इसकी प्रगति की समीक्षा भी की जाएगी, ताकि इसे और अधिक प्रभावी बनाया जा सके।
दो दिवसीय कार्यशाला में सिखाए जा रहे प्रमुख जीवन कौशल : कार्यशाला में प्रशिक्षक शिल्की भाटिया प्रतिभागियों को जीवन कौशल के विभिन्न आयामों पर व्यावहारिक प्रशिक्षण दे रही हैं। प्रशिक्षण प्राप्त शिक्षक आगे अपने-अपने जिलों में अन्य शिक्षकों को प्रशिक्षित करेंगे, जिससे यह पहल राज्यभर के विद्यालयों तक पहुंचेगी।
कार्यक्रम के तहत विद्यार्थियों में समस्या समाधान, आत्म-जागरूकता, प्रभावी संवाद, रचनात्मक एवं आलोचनात्मक चिंतन, समय प्रबंधन, सहानुभूति और तनाव प्रबंधन जैसे कौशल विकसित किए जाएंगे। इसका उद्देश्य उन्हें शैक्षणिक रूप से सक्षम बनाने के साथ-साथ वास्तविक जीवन की चुनौतियों के लिए तैयार करना है। यह पाठ्यक्रम विद्यालयों में सकारात्मक और सहयोगपूर्ण वातावरण को बढ़ावा देते हुए विद्यार्थियों को भावनात्मक रूप से सुदृढ़, आत्मविश्वासी और जिम्मेदार नागरिक बनने में सहायक होगा। इस दौरान समग्र शिक्षा निदेशक राजेश शर्मा ने भारती एयरटेल फाउंडेशन की की नेशनल टीएलएम लीग 2025–26 के विजेता शिक्षकों को सम्मानित भी किया।