चर्चा के दौरान प्रतिभागियों ने Equal Opportunity Cell और SC/ST प्रकोष्ठ की भूमिका और उनकी कार्यप्रणाली पर अपने सुझाव दिए। वक्ताओं ने कहा कि इन निकायों को और अधिक प्रभावी, पारदर्शी और जवाबदेह बनाया जाना चाहिए, ताकि छात्रों की शिकायतों का समय पर समाधान हो सके।
कार्यक्रम में यह भी कहा गया कि विश्वविद्यालय परिसर को संविधान के समानता और गरिमा के मूल्यों पर आधारित होना चाहिए। छात्रों ने मांग की कि नियमों का सही तरीके से क्रियान्वयन हो और सभी समुदायों के छात्रों को बिना भेदभाव के शिक्षा का अधिकार मिले। यह चर्चा 3 घंटों की चली और चर्चा के ठीक 30 मिनट के बाद एबीवीपी के कार्यकर्ता द्वारा हमारे कई साथियों पर गालीगलौच और हाथापाई की जिसमें हमारे एक साथी को चोट भी आई
यह वहीं मनुवादी विचारधारा के लोग हैं
इसका काम समाज को रूढ़िवादी बनाना और इससे स्टूडेंट आंदोलन को कुचलने का काम पूरे देश में किया जा रहा है जानू कि हम तीन दिन पहले की बात करें तो वहां इक्विटी मार्च स्टूडेंट कर रहे थे वहां की वाइस चांसलर के खिलाफ और वहां की एबीवीपी के गुंडे द्वारा उनके उस मार्च में पत्थर बाजी की जाती है आज भी वही अंजाम दिया इस पत्थर बाज एबीवीपी ने दिया
अंत में SFI HPU इकाई ने कहा कि वह कैंपस में छात्रों के मुद्दों को लोकतांत्रिक तरीके से उठाती रहेगी और समान, सुरक्षित और समावेशी शैक्षणिक वातावरण के लिए प्रयास जारी रखेगी। संगठन ने सभी छात्र-छात्राओं से अपील की कि वे विश्वविद्यालय में सकारात्मक और रचनात्मक संवाद को मजबूत करें।