शिमला, 03 अप्रैल 26 (RHNN) : कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता और ठियोग से विधायक कुलदीप सिंह राठौर ने एक साथ दो अहम मुद्दों पर सख्त और स्पष्ट रुख अपनाते हुए राजनीतिक और संगठनात्मक दोनों स्तरों पर बड़ा संदेश दिया है। अमेरिका के साथ प्रस्तावित Free Trade Agreement (FTA) के तहत सेब पर आयात शुल्क घटाने के मुद्दे पर उन्होंने केंद्र सरकार को सीधे कटघरे में खड़ा किया और चेतावनी दी कि हिमाचल के बागवानों के हितों से किसी भी कीमत पर समझौता नहीं किया जाना चाहिए। राठौर ने कहा कि अमेरिका द्वारा जीरो टैरिफ की मांग भारत जैसे कृषि प्रधान देश के लिए गंभीर चिंता का विषय है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि सेब पर आयात शुल्क कम किया जाता है तो इसका सीधा असर हिमाचल प्रदेश की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा, जो काफी हद तक बागवानी पर निर्भर है। उन्होंने कहा कि सस्ते विदेशी सेब के बाजार में आने से स्थानीय उत्पादकों को कीमतों में गिरावट, प्रतिस्पर्धा और नुकसान का सामना करना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि हिमाचल विधानसभा में इस मुद्दे को लेकर जो प्रस्ताव पारित किया गया है, वह केवल एक औपचारिकता नहीं बल्कि केंद्र सरकार को एक सशक्त संदेश है कि राज्य अपने किसानों और बागवानों के हितों को लेकर गंभीर है। राठौर ने उम्मीद जताई कि यह प्रस्ताव केंद्र सरकार पर प्रभाव डालेगा और नीति निर्माण में किसानों के हितों को प्राथमिकता दी जाएगी। राठौर ने इस मुद्दे को केवल हिमाचल तक सीमित न रखते हुए अन्य पहाड़ी राज्यों से भी एकजुटता की अपील की। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर जैसे राज्यों को भी अपने-अपने विधानसभा में इसी तरह के प्रस्ताव पारित करने चाहिए, ताकि सामूहिक रूप से केंद्र सरकार पर दबाव बनाया जा सके। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि पंजाब पहले ही इस दिशा में पहल कर चुका है और प्रस्ताव पारित कर केंद्र को भेज चुका है, जो सराहनीय कदम है। उन्होंने दो टूक कहा, “भारत को अमेरिका के दबाव में नहीं आना चाहिए। देश के किसानों और बागवानों के हित सर्वोपरि हैं और किसी भी अंतरराष्ट्रीय समझौते में इनकी अनदेखी नहीं की जा सकती।” राठौर ने किसान आयोग के गठन की भी वकालत करते हुए कहा कि इससे कृषि क्षेत्र को नीतिगत मजबूती मिलेगी और किसानों की समस्याओं का समाधान अधिक प्रभावी ढंग से किया जा सकेगा। FTA के मुद्दे पर केंद्र सरकार की नीतियों पर सवाल उठाने के साथ-साथ राठौर ने पार्टी के भीतर अनुशासन को लेकर भी सख्त रुख अपनाया। Himachal Pradesh Congress Committee की अनुशासन समिति के अध्यक्ष के रूप में उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी संगठन की मजबूती उसके अनुशासन पर निर्भर करती है और कांग्रेस पार्टी भी इससे अलग नहीं है। उन्होंने कहा कि हर राजनीतिक दल का अपना संविधान होता है और उसी के तहत कार्य करना प्रत्येक नेता और कार्यकर्ता की जिम्मेदारी है। राठौर ने दोहराया कि वे किसी भी प्रकार के दबाव में काम नहीं करते और जो भी निर्णय होगा, वह पूरी तरह पार्टी के हित और संविधान के अनुरूप ही लिया जाएगा। राठौर ने सख्त लहजे में चेतावनी दी कि यदि कोई विधायक, पदाधिकारी या पार्टी नेता संगठनात्मक कार्यों में अनावश्यक हस्तक्षेप करता है या पार्टी मंच के बाहर अपनी व्यक्तिगत राय सार्वजनिक रूप से व्यक्त करता है, तो इसे अनुशासनहीनता माना जाएगा और उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि पार्टी की छवि को नुकसान पहुंचाने वाली गतिविधियों को किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने यह भी संकेत दिए कि जल्द ही अनुशासन समिति की बैठक आयोजित की जाएगी, जिसमें हालिया घटनाक्रमों पर विस्तार से चर्चा होगी और आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। इस बैठक में पार्टी के भीतर अनुशासन को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश तय किए जा सकते हैं, ताकि भविष्य में इस तरह की स्थिति उत्पन्न न हो। राठौर ने कहा कि उनकी जवाबदेही केवल पार्टी हाईकमान और संविधान के प्रति है और वे उसी के अनुसार अपने दायित्वों का निर्वहन करेंगे। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अनुशासन समिति को हल्के में लेना किसी के लिए भी ठीक नहीं होगा और यदि कोई ऐसा करता है तो उसे इसके परिणाम भुगतने होंगे। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, राठौर का यह रुख प्रदेश कांग्रेस के भीतर एक मजबूत संदेश के रूप में देखा जा रहा है। एक ओर जहां वे केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ आक्रामक रुख अपनाकर किसानों और बागवानों के हितों की आवाज उठा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर संगठन के भीतर अनुशासन को लेकर सख्ती दिखाकर पार्टी को एकजुट रखने का प्रयास कर रहे हैं। इस पूरे घटनाक्रम से यह स्पष्ट संकेत मिल रहा है कि कांग्रेस पार्टी हिमाचल प्रदेश में आने वाले समय में दोहरी रणनीति के साथ आगे बढ़ने की तैयारी में है—बाहरी स्तर पर केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ मुखर विरोध और आंतरिक स्तर पर संगठन को मजबूत और अनुशासित बनाना। राठौर के बयान न केवल वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों को दर्शाते हैं, बल्कि यह भी संकेत देते हैं कि पार्टी अब किसी भी प्रकार की ढिलाई के मूड में नहीं है।