धरने के समापन पर राज्य अध्यक्ष रंजना जरेट ने आरोप लगाया कि सरकार ने बिना पर्याप्त तैयारी और सोच-विचार के यह निर्णय लिया है। उन्होंने कहा कि एक ओर सरकार बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं का दावा कर रही है, वहीं दूसरी ओर जांचों और इलाज में शुल्क बढ़ाकर आम लोगों पर आर्थिक बोझ डाला जा रहा है।
वहीं, राज्य सचिव फालमा चौहान ने कहा कि प्रसूति और गायनी सेवाओं को अलग करना विश्व स्वास्थ्य संगठन और मेडिकल काउंसिल के दिशा-निर्देशों के खिलाफ है।
उन्होंने आरोप लगाया कि रोबोटिक सर्जरी के नाम पर महिलाओं को अनावश्यक रूप से परेशान किया जा रहा है। धरने के बाद समिति ने मुख्यमंत्री सहित संबंधित अधिकारियों को एम एस केएनएच अस्पताल सुंदर नेगी के माध्यम से ज्ञापन भेजा है और चेतावनी दी है कि यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो 30 अप्रैल को आईजीएमसी के बाहर जोरदार प्रदर्शन किया जाएगा।