एसोसिएशन ने सरकार के समक्ष मांग रखी कि पिछले 13 वर्षों से प्रदेश के सरकारी विद्यालयों में सेवाएं दे रहे व्यावसायिक शिक्षकों के लिए स्थायी नीति बनाई जाए तथा आउटसोर्स व्यवस्था समाप्त कर उन्हें शिक्षा विभाग में समायोजित करते हुए नियमित किया जाए। संगठन ने यह भी मांग उठाई कि व्यावसायिक शिक्षकों का वेतन अन्य राज्यों की तर्ज पर सम्मानजनक बनाया जाए तथा प्रत्येक वर्ष 5% वार्षिक वेतन वृद्धि का प्रावधान किया जाए।
एसोसिएशन पदाधिकारियों ने बताया कि हिमाचल प्रदेश में वर्तमान में व्यावसायिक शिक्षकों को मात्र ₹20,000 से ₹25,000 तक का मानदेय प्राप्त हो रहा है, जबकि दिल्ली, हरियाणा, उत्तराखंड एवं पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में व्यावसायिक शिक्षकों को कहीं अधिक वेतन एवं बेहतर सेवा सुरक्षा प्रदान की जा रही है।
संगठन ने यह भी उल्लेख किया कि शिक्षा विभाग में व्यावसायिक शिक्षक ही एकमात्र ऐसी शिक्षक श्रेणी है जो एक दशक से अधिक सेवाएं देने के बावजूद अभी तक नियमितीकरण से वंचित है। उन्होंने कहा कि इस विषय में कोई कानूनी बाधा भी नहीं है, क्योंकि माननीय उच्च न्यायालय भी 10 वर्ष से अधिक सेवा देने वाले आउटसोर्स कर्मचारियों के हित में सकारात्मक टिप्पणियां कर चुका है। वोकेशनल शिक्षकों ने आशा व्यक्त की कि प्रदेश सरकार उनकी मांगों पर संवेदनशीलता के साथ शीघ्र सकारात्मक निर्णय लेकर हजारों प्रशिक्षकों एवं उनके परिवारों के भविष्य को सुरक्षित करेगी। संगठन ने विश्वास जताया कि मुख्यमंत्री कर्मचारियों की समस्याओं को समझते हुए व्यावसायिक शिक्षकों के हित में ऐतिहासिक निर्णय लेंगे।