शिमला,26 मई 26 (RHNN) : 88 वर्षीय बुजुर्ग मरीज के लिए 30 साल पहले डाले गए हार्ट स्टेंट ही जान का खतरा बन गए थे। स्टेंट पूरी तरह ब्लॉक हो चुके थे और धमनियों में भारी मात्रा में कैल्शियम व स्कारिंग जमा हो गई थी। कई अस्पतालों में इलाज के विकल्प सीमित होने के बाद आखिरकार Fortis Hospital Mohali में अत्याधुनिक लेजर कोरोनरी एंजियोप्लास्टी (ईएलसीए) तकनीक के जरिए मरीज को नई जिंदगी मिली। मरीज को लगातार सीने में तेज दर्द और दबाव की शिकायत थी। डॉक्टरों ने उसकी उम्र को देखते हुए ओपन हार्ट सर्जरी को बेहद जोखिम भरा माना, जबकि दोबारा सामान्य एंजियोप्लास्टी भी संभव नहीं थी। ऐसे में मरीज को केवल दवाइयों के सहारे रहने की सलाह दी गई थी, लेकिन दर्द लगातार बढ़ता जा रहा था।
इसके बाद Dr. R.K. Jaswal और उनकी टीम ने फिलिप्स-इंडिया की अत्याधुनिक एक्साइमर लेजर कोरोनरी एंजियोप्लास्टी तकनीक का इस्तेमाल कर ब्लॉक धमनियों को सफलतापूर्वक खोला। इस प्रक्रिया में हाई-इंटेंसिटी लेजर लाइट से धमनियों में जमी रुकावट को पूरी तरह हटाया गया।
डॉ. जसवाल ने बताया कि सामान्य एंजियोप्लास्टी में ब्लॉकेज को केवल दबाव से हटाया जाता है, जबकि ईएलसीए तकनीक ब्लॉकेज को जड़ से खत्म करती है। इससे धमनी दोबारा बंद होने, ब्लड क्लॉट बनने और हार्ट अटैक का खतरा काफी कम हो जाता है। ऑपरेशन के बाद मरीज की हालत सामान्य रही और दो दिन बाद उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।