शिमला,29 मई 26 (RHNN) : मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा और व्यावसायिक पाठ्यक्रमों के लिए बड़ी राहत दे रही है। डॉ. वाईएस परमार विद्यार्थी ऋण योजना के तहत छात्रों को मात्र एक प्रतिशत ब्याज दर पर 20 लाख रुपये तक का शिक्षा ऋण उपलब्ध करवाया जा रहा है, ताकि आर्थिक तंगी किसी भी युवा के सपनों के बीच बाधा न बने। मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों से इस योजना का अधिकतम लाभ उठाने और अपने जीवन के लक्ष्य हासिल करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार शिक्षा व्यवस्था को आधुनिक और गुणवत्तापूर्ण बनाने के लिए लगातार सुधार कर रही है, जिससे विद्यार्थियों को अपने घर के नजदीक बेहतर शिक्षा सुविधाएं मिल सकें। सुक्खू ने कहा कि प्रदेश के 156 से अधिक स्कूलों में सीबीएसई पाठ्यक्रम शुरू किया गया है। इन स्कूलों में कला, विज्ञान और वाणिज्य संकायों में पढ़ाई की सुविधा उपलब्ध करवाई गई है, ताकि ग्रामीण और दूरदराज क्षेत्रों के विद्यार्थियों को भी प्रतिस्पर्धी शिक्षा मिल सके। मुख्यमंत्री ने दावा किया कि सरकार के व्यावहारिक प्रयासों के चलते शिक्षा क्षेत्र में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। हाल ही में हुए एक राष्ट्रीय सर्वेक्षण में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने के मामले में हिमाचल प्रदेश 13वें स्थान से छलांग लगाकर 6वें स्थान पर पहुंच गया है। उन्होंने इसे प्रदेश के लिए बड़ी उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार बेटियों को सशक्त बनाने की दिशा में भी अहम फैसले ले रही है। इसी कड़ी में बेटियों की विवाह योग्य आयु को लड़कों के समान 18 वर्ष से बढ़ाकर 21 वर्ष किया गया है। मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य में अनुसूचित जनजाति समुदाय की शिक्षा और योगदान के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए 10 मई से 9 जून 2026 तक “अनुसूचित जनजाति गरिमा उत्सव” मनाया जा रहा है। इसके माध्यम से समाज में शिक्षा और समानता के संदेश को मजबूत किया जा रहा है।