शिमला,03 जून 26 (RHNN) : कभी नशे की दलदल में फंसे रहे कई युवाओं ने आज शिमला क्रिकेट कार्निवल के मैदान में उतरकर यह संदेश दिया कि इच्छाशक्ति, परिवार का सहयोग और सही मार्गदर्शन मिलने पर जिंदगी को नई दिशा दी जा सकती है। शिमला क्रिकेट कार्निवल में बुधवार को सनराइज़ रीबर्थ रिहैबिलिटेशन सेंटर की टीम की भागीदारी ने खेल प्रतियोगिता को सामाजिक जागरूकता के अभियान में बदल दिया। सनराइज़ रीबर्थ और ओल्ड टाउन बस स्टैंड के बीच खेले गए मुकाबले में खिलाड़ियों ने केवल क्रिकेट ही नहीं खेला, बल्कि अपने जीवन संघर्ष की कहानी भी लोगों के सामने रखी। टीम में शामिल अधिकांश खिलाड़ी ऐसे युवा हैं, जो कभी नशे की लत से जूझ चुके हैं और अब पुनर्वास के बाद सामान्य जीवन की ओर लौट रहे हैं।
टीम के कप्तान आशीष ने बताया कि वह स्वयं वर्षों पहले नशे की गिरफ्त में थे, लेकिन पिछले 12 वर्षों से नशामुक्त जीवन जी रहे हैं। अब वह नशामुक्ति केंद्र संचालित कर उन युवाओं की मदद कर रहे हैं, जो नशे के कारण जीवन की राह भटक गए थे। उन्होंने कहा कि खेल, अनुशासन और सकारात्मक माहौल युवाओं को दोबारा आत्मविश्वास दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। हिमाचल प्रदेश में बढ़ते चिट्टे के खतरे के बीच शिमला क्रिकेट कार्निवल का "नशा छोड़ो, खेल खेलो" अभियान युवाओं को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित कर रहा है। आयोजकों का मानना है कि नशे से बाहर निकल चुके युवाओं को समाज में दूसरा मौका मिलना चाहिए, ताकि वे सम्मान के साथ अपना भविष्य संवार सकें।
हिमालयन स्पोर्ट्स एंड कल्चरल यूथ सोसायटी तथा ब्लैक ब्लैंकेट एनजीओ के सहयोग से चल रहे इस अभियान के तहत खेल को सामाजिक परिवर्तन का माध्यम बनाया जा रहा है। संस्था के अध्यक्ष वीरेंद्र बांश्टु ने कहा कि नशे से उबर चुके युवाओं को भेदभाव नहीं, बल्कि प्रोत्साहन और अवसर देने की जरूरत है। ऐसे प्रयास न केवल युवाओं का जीवन बदलते हैं, बल्कि समाज को भी सकारात्मक दिशा देते हैं।