इस दौरान सोटो के प्रतिनिधियों ने राज्यपाल को अंगदान की आवश्यकता, इसके सामाजिक महत्व तथा प्रदेश में चलाए जा रहे जागरूकता कार्यक्रमों के बारे में विस्तार से अवगत कराया। कार्यक्रम के दौरान सोटो की ओर से राज्यपाल को स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया। शिविर में बड़ी संख्या में लोगों ने भाग लिया तथा रक्तदान और अंगदान के प्रति जागरूकता बढ़ाने का संकल्प लिया। प्रदेश रेड क्रॉस सोसाइटी और सोटो के इस संयुक्त प्रयास को लोगों ने सराहते हुए इसे समाज हित में एक महत्वपूर्ण पहल बताया।
सोटो की मीडिया कंसल्टेंट रामेश्वरी ने बताया कि अंगदान वह प्रक्रिया है जिसमें हम मृत्यु के बाद किसी जरूरतमंद मरीज को अंगदान करके नया जीवन दे सकते हैं। एक व्यक्ति अंगदान का प्रण लेकर कम से कम आठ लोगों की जान बचा सकता है। दान किए गए अंगों को प्रतीक्षा सूची में इंतजार कर रहे मरीजों को प्रत्यारोपित किया जाता है। अंगदान तभी संभव है जब रोगी की मृत्यु आईसीयू में हो और रोगी को ब्रेन डेड घोषित कर दिया गया हो। घर पर मृत्यु होने पर जीवनदाई अंग नहीं लिए जा सकते हैं । ऐसी स्थिति में निर्धारित समय अवधि के अंदर केवल कार्निया दान किया जा सकता है।