इनमें भारतीय लोक संस्कृति, आध्यात्मिक विषयों, पारंपरिक डिजाइनों और आधुनिक कला का सुंदर समावेश देखने को मिल रहा है। क्ले पर उकेरे गए बारीक डिजाइनों और उनमें जड़े शीशों की चमक ने दर्शकों को खासा प्रभावित किया। कई लोग कलाकृतियों के साथ तस्वीरें लेते और उनकी कलात्मक बारीकियों को नजदीक से निहारते नजर आए।
प्रदर्शनी की विशेषता लिप्पन आर्ट है, जो गुजरात के कच्छ क्षेत्र की प्रसिद्ध पारंपरिक लोक कला मानी जाती है। इस कला में क्ले और छोटे-छोटे शीशों का उपयोग कर आकर्षक आकृतियां बनाई जाती हैं। गेयटी थिएटर में प्रदर्शित कृतियों में इस पारंपरिक कला को आधुनिक रूप में प्रस्तुत किया गया है, जिससे यह दर्शकों के लिए और भी रोचक बन गई है।
रूपाली शर्मा ने बताया कि प्रदर्शनी का उद्देश्य लिप्पन आर्ट जैसी पारंपरिक लोक कलाओं को बढ़ावा देना और हस्तनिर्मित कला के प्रति लोगों को जागरूक करना है। उन्होंने कहा कि दूसरे दिन दर्शकों से मिली सकारात्मक प्रतिक्रिया उत्साहवर्धक है और इससे कलाकारों को अपनी कला को आगे बढ़ाने की प्रेरणा मिलती है।प्रदर्शनी के अंतिम दिन भी बड़ी संख्या में कला प्रेमियों के पहुंचने की उम्मीद है।