लोगों ने सवाल उठाया है कि आखिर ऐसी क्या मजबूरी थी कि निजी बस का समय बदलकर उसे सरकारी बसों के आगे कर दिया गया। लोगों का कहना है कि पहले यह निजी बस सुबह 8:15 बजे चलती थी, जिससे स्कूली छात्रों, कर्मचारियों और अन्य यात्रियों को सुविधा मिलती थी। अब समय परिवर्तन के बाद 8:15 बजे की सुविधा समाप्त हो गई है। इससे छात्रों को स्कूल पहुंचने के लिए पहले वाली बसें पकड़नी पड़ रही हैं और उन्हें करीब एक घंटा पहले घर से निकलना पड़ता है। वहीं अगली बस लगभग 9:15 बजे मिलने से अन्य यात्रियों की परेशानी भी बढ़ गई है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि इसी प्रकार के निर्णयों के कारण एचआरटीसी के रूट कमजोर पड़ते हैं। जब निजी बसों को सरकारी बसों से कुछ मिनट पहले चलाया जाता है तो स्वाभाविक रूप से सवारियां प्रभावित होती हैं और बाद में इन्हीं रूटों को घाटे वाला बताकर बंद करने या सेवाएं कम करने की बात की जाती है। ग्रामीणों ने सरकार और परिवहन विभाग से मांग की है कि इस निर्णय की समीक्षा की जाए। उनका कहना है कि यदि निजी बस का समय बदला गया है तो सुबह 8:15 बजे के समय पर एचआरटीसी बस चलाई जाए, ताकि स्कूली बच्चों, कर्मचारियों और आम यात्रियों को राहत मिल सके तथा सरकारी परिवहन सेवाओं को भी नुकसान न पहुंचे।