उन्होंने कहा कि सरकारें लगातार मिड डे मील योजना को कमजोर करने, स्कूलों के विलय, स्कूलों के बंद करने, क्लस्टर योजना और केन्द्रीय किचन जैसी नीतियों के माध्यम से हजारों कर्मियों के रोजगार पर संकट खड़ा कर रही हैं।
सभा को संबोधित करते हुए मिड डे मील वर्कर्ज यूनियन के राज्य अध्यक्ष संदीप कुमार, महासचिव शांति देवी तथा राज्य कोषाध्यक्ष सपना ने कहा कि हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय ने मिड डे मील कर्मियों को 10 माह के बजाय 12 माह का वेतन देने का ऐतिहासिक फैसला दिया था, जिसे सिंगल बेंच और डबल बेंच दोनों ने बरकरार रखा है। इसके बावजूद प्रदेश सरकार इस फैसले को लागू करने के बजाय सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई है। उन्होंने कहा कि 25 बच्चों की शर्त, स्कूलों के विलय, क्लस्टर योजना, केन्द्रीय किचन, ठेकाकरण और एनजीओ के माध्यम से योजना के निजीकरण के कारण हजारों मिड डे मील कर्मियों का रोजगार खतरे में है, जिसका यूनियन पुरजोर विरोध करेगी।
नेताओं ने बताया कि प्रदेश में लगभग 21 हजार मिड डे मील कर्मी कार्य कर रहें हैं, लेकिन उन्हें केंद्र सरकार द्वारा दिये जाने वाले 1000 रुपये को मिलाकर मात्र 5000 रुपये मासिक मानदेय दिया जाता है और वह भी केवल 10 महीनों के लिए। उन्होंने कहा कि पिछले 17 वर्षों में केन्द्र सरकार ने मिड डे मील कर्मियों के मानदेय में एक रुपये की भी वृद्धि नहीं की है। उन्होंने मांग की कि हरियाणा की तर्ज पर 7000 रुपये मासिक वेतन, 12 माह का वेतन, ईपीएफ, ईएसआई, ग्रेच्युटी, पेंशन, कर्मचारी मुआवजा, 20 आकस्मिक अवकाश, दो वर्दियां, समय पर वेतन भुगतान, 25 बच्चों की शर्त की समाप्ति, 10+2 तक योजना का विस्तार, मल्टी टास्क वर्कर भर्ती में प्राथमिकता तथा क्लस्टर योजना और केन्द्रीय किचन के नाम पर किसी भी कर्मी की छंटनी पर रोक लगाई जाए।
प्रदर्शन में शिमला जिला से राजमिला, चंपा, जयवंती व विमला कांगड़ा जिला से सरिता देवी, रेशमा व उषा लाहौल स्पीति से गोपाल व लीला कुल्लू जिला से श्यामा, प्रेम लता व वृंदा ऊना से नरेश, पूनम व रीतू बिलासपुर से अनुराधा, पूनम सोलन से लीला व पवन हमीरपुर से मीरा खान चंबा से विपिन व सरोज मौजूद रहे।रैली के बाद यूनियन के प्रतिनिधिमंडल ने मुख्य सचिव हिमाचल प्रदेश के माध्यम से सरकार को मांगपत्र सौंपकर मिड डे मील कर्मियों की समस्याओं और मांगों को रखा, जिस पर मुख्य सचिव द्वारा जल्द शिक्षा मंत्री से बैठक करने का आश्वासन दिया। प्रतिनिधिमंडल ने चेतावनी दी कि यदि मिड डे मील कर्मियों की मांगों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो प्रदेश भर में आंदोलन को और तेज किया जाएगा तथा संघर्ष को व्यापक रूप दिया जाएगा।