शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने बैठक के दौरान हिमाचल के शैक्षणिक परिदृश्य से अवगत कराया और कहा कि दोनों राज्यों की चुनौतियां एक जैसी हैं। ऐसे में दोनों राज्य एक-दूसरे के अनुभवों और सफल पहलों से सीख लेकर अपनी शिक्षा व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ बना सकते हैं। शिक्षा मंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू के नेतृत्व में प्रदेश सरकार ने शिक्षा क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण सुधार किए हैं। सरकारी स्कूलों को सीबीएसई से संबद्ध करने की पहल की गई है, जिससे विद्यार्थियों को राष्ट्रीय स्तर की प्रतिस्पर्धाओं और उच्च शिक्षा के बेहतर अवसर मिलेंगे। सरकारी विद्यालयों में अंग्रेजी माध्यम से शिक्षा शुरू की गई है, ताकि विद्यार्थियों को आधुनिक और प्रतिस्पर्धी वातावरण के अनुरूप तैयार किया जा सके। शिक्षा मंत्री ने कहा कि शिक्षकों की क्षमता निर्माण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। इसी दिशा में शिक्षकों को सिंगापुर में प्रशिक्षण एवं शैक्षणिक भ्रमण पर भेजने की पहल की गई तथा सिंगापुर की प्रतिष्ठित प्रिंसिपल्स अकादमी के साथ समझौता भी किया गया।
इसी तरह यूनेस्को के सहयोग से ‘एचपी फ्यूचर्स प्रोग्राम’ शुरू किया गया है, जिसके माध्यम से विद्यार्थियों को नवाचार, नेतृत्व क्षमता, सतत विकास और 21वीं सदी की आवश्यक दक्षताओं से सुसज्जित किया जा रहा है। शिक्षकों की गुणवत्ता को वैश्विक स्तर पर सशक्त बनाने के लिए विश्व प्रसिद्ध यूनिवर्सिटी ऑफ कैम्ब्रिज के साथ भी ऐतिहासिक समझौता किया गया है। रोहित ठाकुर ने कहा कि शिक्षा क्षेत्र में किए गए सुधारों के सकारात्मक परिणाम अब राष्ट्रीय स्तर पर दिखाई देने लगे हैं। परख राष्ट्रीय सर्वेक्षण में हिमाचल प्रदेश ने देशभर में पांचवां स्थान प्राप्त किया है, जबकि परफॉर्मेंस ग्रेडिंग इंडेक्स (पीजीआई) में प्रदेश छठे स्थान पर पहुंच गया है। असर (ASER) रिपोर्ट में भी विद्यार्थियों के सीखने के स्तर में उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया गया है। शिक्षा मंत्री ने कहा कि जम्मू-कश्मीर का यह दौरा दोनों राज्यों को एक-दूसरे की सफल पहलों और अनुभवों को साझा करने का अवसर प्रदान करेगा। इससे दोनों राज्यों की शिक्षा व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाने में मदद मिलेगी।