शिमला, 25 जून (rhnn) : शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने जम्मू-कश्मीर के दौरे के दौरान आज मुख्यमंत्री डॉ. उमर अब्दुल्ला से मुलाकात की। शिक्षा मंत्री ने जम्मू-कश्मीर की शिक्षा मंत्री सकीना मसूद इटू और स्कूली शिक्षा निदेशक नसीर अहमद वानी के साथ भी अलग से बैठक की। इन बैठकों में दोनों राज्यों ने अपनी शिक्षा व्यवस्था, नवाचारों, चुनौतियों, सुधारों तथा भविष्य की संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा की। इस दौरान हिमाचल के समग्र शिक्षा निदेशक राजेश शर्मा, स्कूली शिक्षा निदेशक आशीष कोहली तथा अतिरिक्त सचिव (शिक्षा) अनिल चौहान विशेष तौर पर उपस्थित रहे। इस मौके पर मुख्यमंत्री डॉ. उमर अब्दुल्ला ने कहा कि भौगोलिक और अन्य विशेष परिस्थितियों के कारण जम्मू-कश्मीर की शिक्षा व्यवस्था अनेक चुनौतियों का सामना कर रही है। इसके बावजूद राज्य सरकार शिक्षा की गुणवत्ता, पहुंच और समावेशिता को मजबूत बनाने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है। इन प्रयासों का सकारात्मक प्रभाव विद्यार्थियों के नामांकन और शैक्षणिक उपलब्धियों में दिखाई देने लगा है। जम्मू-कश्मीर की शिक्षा मंत्री सकीना मसूद इटू ने कहा कि जम्मू-कश्मीर और हिमाचल प्रदेश की भौगोलिक परिस्थितियां तथा शिक्षा क्षेत्र से जुड़ी कई चुनौतियां काफी हद तक समान हैं। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर में स्कूली शिक्षा व्यवस्था की ऑनलाइन निगरानी को सुदृढ़ किया गया है, जिससे विद्यालयों की कार्यप्रणाली और शैक्षणिक गतिविधियों की नियमित मॉनिटरिंग सुनिश्चित हो रही है। उन्होंने कहा कि सरकार शिक्षकों के शैक्षणिक प्रदर्शन को बेहतर बनाने पर विशेष ध्यान दे रही है तथा शिक्षकों के लिए एक पारदर्शी और प्रभावी तबादला नीति तैयार करने की दिशा में भी कार्य कर रही है। सकीना इटू ने कहा कि जम्मू-कश्मीर सरकार प्रत्येक बच्चे तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पहुंचाने, युवाओं की रोजगार क्षमता बढ़ाने और उन्हें बेहतर अवसर उपलब्ध कराने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने बैठक के दौरान हिमाचल के शैक्षणिक परिदृश्य से अवगत कराया और कहा कि दोनों राज्यों की चुनौतियां एक जैसी हैं। ऐसे में दोनों राज्य एक-दूसरे के अनुभवों और सफल पहलों से सीख लेकर अपनी शिक्षा व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ बना सकते हैं। शिक्षा मंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू के नेतृत्व में प्रदेश सरकार ने शिक्षा क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण सुधार किए हैं। सरकारी स्कूलों को सीबीएसई से संबद्ध करने की पहल की गई है, जिससे विद्यार्थियों को राष्ट्रीय स्तर की प्रतिस्पर्धाओं और उच्च शिक्षा के बेहतर अवसर मिलेंगे। सरकारी विद्यालयों में अंग्रेजी माध्यम से शिक्षा शुरू की गई है, ताकि विद्यार्थियों को आधुनिक और प्रतिस्पर्धी वातावरण के अनुरूप तैयार किया जा सके। शिक्षा मंत्री ने कहा कि शिक्षकों की क्षमता निर्माण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। इसी दिशा में शिक्षकों को सिंगापुर में प्रशिक्षण एवं शैक्षणिक भ्रमण पर भेजने की पहल की गई तथा सिंगापुर की प्रतिष्ठित प्रिंसिपल्स अकादमी के साथ समझौता भी किया गया। इसी तरह यूनेस्को के सहयोग से ‘एचपी फ्यूचर्स प्रोग्राम’ शुरू किया गया है, जिसके माध्यम से विद्यार्थियों को नवाचार, नेतृत्व क्षमता, सतत विकास और 21वीं सदी की आवश्यक दक्षताओं से सुसज्जित किया जा रहा है। शिक्षकों की गुणवत्ता को वैश्विक स्तर पर सशक्त बनाने के लिए विश्व प्रसिद्ध यूनिवर्सिटी ऑफ कैम्ब्रिज के साथ भी ऐतिहासिक समझौता किया गया है। रोहित ठाकुर ने कहा कि शिक्षा क्षेत्र में किए गए सुधारों के सकारात्मक परिणाम अब राष्ट्रीय स्तर पर दिखाई देने लगे हैं। परख राष्ट्रीय सर्वेक्षण में हिमाचल प्रदेश ने देशभर में पांचवां स्थान प्राप्त किया है, जबकि परफॉर्मेंस ग्रेडिंग इंडेक्स (पीजीआई) में प्रदेश छठे स्थान पर पहुंच गया है। असर (ASER) रिपोर्ट में भी विद्यार्थियों के सीखने के स्तर में उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया गया है। शिक्षा मंत्री ने कहा कि जम्मू-कश्मीर का यह दौरा दोनों राज्यों को एक-दूसरे की सफल पहलों और अनुभवों को साझा करने का अवसर प्रदान करेगा। इससे दोनों राज्यों की शिक्षा व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाने में मदद मिलेगी।