शिमला, 10 जुलाई(rhnn) : हिमाचल प्रदेश मिड डे मील वर्कर्स यूनियन संबंधित सीटू का एक प्रतिनिधिमंडल अपनी मांगों को लेकर शिक्षा मंत्री श्री रोहित ठाकुर से मिला। शिक्षा मंत्री ने मजदूरों का वेतन बढ़ाने, हर महीने समय पर पूर्ण वेतन देने, 20 छुट्टियाँ देने, दो वर्दी देने, पोलिंग डयूटी का आर्थिक भुगतान करने, 21 अगस्त के निदेशक के डयूटी संबंधी आदेशों को लागू करने, तीन की जगह वर्ष में केवल एक मेडिकल चेक अप करने व उस दिन का वेतन भुगतान करने, क्लस्टर स्कूलों से कर्मियों की छंटनी बंद करने, कर्मियों के लिए ईपीएफ, ईएसआई, ग्रेच्युटी, कर्मचारी मुआवजा सुविधा लागू करने, 25 बच्चों की शर्त हटाने व 25 अथवा उससे कम बच्चों पर छंटनी बंद करने, 12 महीने के वेतन देने आदि मुद्दों पर सकारात्मक समाधान करने का आश्वासन दिया। प्रतिनिधिमंडल में सीटू प्रदेशाध्यक्ष विजेंद्र मेहरा, महासचिव प्रेम गौतम, कोषाध्यक्ष जगत राम, यूनियन प्रदेशाध्यक्ष संदीप कुमार, महासचिव शांति देवी, कोषाध्यक्ष सपना ठाकुर, पूनम, विपिन, विनीत, रेखा, मीरा खान, भुवनेश्वरी, श्यामा शर्मा आदि शामिल रहे। यूनियन अध्यक्ष संदीप कुमार व महासचिव शांति देवी ने कहा है कि अगर मांगों का समाधान न हुआ तो 2 अगस्त को होने वाली राज्य कमेटी बैठक में आंदोलन की रूपरेखा तय होगी। उन्होंने कहा कि प्रदेश के स्कूलों में 21 000 बच्चों को दोपहर का खाना बनाने का कार्य करते हैं हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट की सिंगल बेंच और डबल बेंच ने मिड डे मील वर्कर्स के पक्ष में फैसला दिया कि 10 महीने के बजाय 12 महीने का वेतन दिया जाए परंतु सरकार ने इस फैसले को आज तक लागू नहीं किया। मिड डे मील वर्कर्स को पूरे साल एक भी छुट्टी नहीं दी जाती। उन्हें तीन-तीन महीने तक वेतन नहीं दिया जाता। मिड डे मील वर्कर्स को पूरा वेतन एक साथ नहीं दिया जाता। मिड डे मील की नौकरी से संबंधित 25 बच्चों की शर्त के चलते हमेशा मिड डे मील वर्कर को बच्चों की संख्या कम होने पर नौकरी से निकाल दिया जाता है। चुनाव के समय पोलिंग पार्टी को खाना बनाने का कार्य मिड डे मील वर्कर को दिया जाता है परंतु उन्हें उसके बदले कोई मानदेय नहीं दिया जाता है जो कि मिड डे मील वर्कर्स के साथ पूरी तरह अन्याय है। मिड डे मील वर्कर्स को रिटायरमेंट पर ग्रेच्युटी व पेंशन की सुविधा तक नहीं दी जाती। मिड डे मील वर्कर का साल में तीन बार मेडिकल चेकअप करवाया जाता है परंतु शिक्षा विभाग द्वारा उनको मेडिकल चेकअप व टेस्टो और आने जाने तक का खर्चा नहीं दिया जाता। मिड डे मील वर्कर यूनियन सरकार के समक्ष अपनी मांगों को रखेगी उन्होंने मांग की है कि मिड डे मील वर्कर को माननीय प्रदेश हाई कोर्ट के फैसले के मुताबिक 10 महीने की बजाय 12 महीने का वेतन दिया जाए। हरियाणा की तर्ज पर मिड डे मील वर्कर्स को 7000 रुपये वेतन दिया जाए। वर्कर्स को आंगनबाड़ी की तर्ज पर साल में 20 छुट्टियां दी जाए। मिड डे मील वर्कर्स की नौकरी से संबंधित 25 बच्चों की शर्त को हटाया जाए। मिड डे मील वर्कर्स को रिटायरमेंट पर ग्रेच्युटी व पेंशन दी जाए। मिड डे मील वर्कर्स के मेडिकल चेकअप का सारा खर्चा शिक्षा विभाग द्वारा दिया जाए। मिड डे मील योजना को प्लस टू तक के बच्चों के लिए लागू किया जाए। मिड डे मील वर्कर्स को पूरा वेतन एक साथ दिया जाए और पहली तारीख को आवश्यक रूप से उसका भुगतान किया जाए। चुनाव के समय पोलिंग पार्टी को खाना बनाने का कार्य करने पर उसका अतिरिक्त वेतन दिया जाए। मिड डे मील वर्कर को रेगुलर करने के लिए नीति बनाई जाए।