शिमला, 10 जुलाई(rhnn) : हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल श्री कविंद्र गुप्ता ने कहा कि सरदार वल्लभभाई पटेल केवल भारत के राजनीतिक एकीकरण के शिल्पकार ही नहीं थे, बल्कि भारतीय संघवाद के सशक्त प्रवक्ता भी थे। उन्होंने कहा कि भारत का संघीय ढांचा विश्व में अद्वितीय है, जहां विभिन्न भाषाएं, संस्कृतियां और परंपराएं संविधान के सूत्र में बंधी हुई हैं और यही संविधान राष्ट्रीय एकता का आधार है। राज्यपाल आज भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान (आईआईएएस), शिमला में आयोजित ‘सरदार पटेल की दृष्टि: एकीकरण, अखंडता और संघवाद’ विषयक अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी के उद्घाटन सत्र तथा ‘वंदे मातरम्: एक यात्रा’ प्रदर्शनी के उद्घाटन समारोह को मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित कर रहे थे। भारत के माननीय उपराष्ट्रपति श्री सी. पी. राधाकृष्णन, जो इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित होने वाले थे, प्रतिकूल मौसम के कारण कार्यक्रम में सम्मिलित नहीं हो सके। उनके स्थान पर कार्यक्रम के दौरान उनका वीडियो संदेश प्रसारित किया गया। अपने संबोधन में राज्यपाल ने कहा कि आज के दोनों आयोजन भारत की राष्ट्रीय चेतना के दो स्थायी स्तंभों को समर्पित हैं। ‘वंदे मातरम्: एक यात्रा’ प्रदर्शनी जहां स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान करोड़ों भारतीयों को प्रेरित करने वाली सांस्कृतिक एवं भावनात्मक चेतना का सजीव चित्रण प्रस्तुत करती है, वहीं यह अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी सरदार पटेल के उस दूरदर्शी नेतृत्व का पुनर्स्मरण करती है, जिसने भारत को एकसूत्र में पिरोकर एक सशक्त एवं संगठित राष्ट्र की नींव रखी। राज्यपाल ने ‘वंदे मातरम्’ को भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की आत्मा बताते हुए कहा कि बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय की यह अमर रचना पीढ़ी-दर-पीढ़ी स्वतंत्रता सेनानियों में त्याग, राष्ट्रभक्ति और मातृभूमि के प्रति समर्पण की भावना का संचार करती रही। उन्होंने कहा कि यह प्रदर्शनी केवल ऐतिहासिक दस्तावेजों और चित्रों का संग्रह नहीं, बल्कि भारत के राष्ट्रीय जागरण की एक जीवंत गाथा है, जो विशेष रूप से युवा पीढ़ी को देश के गौरवशाली इतिहास से परिचित कराएगी। सरदार पटेल को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए श्री गुप्ता ने कहा कि उनका योगदान केवल 560 से अधिक देशी रियासतों के एकीकरण तक सीमित नहीं था। उन्होंने बारडोली सत्याग्रह में उनके अनुकरणीय नेतृत्व, अद्भुत संगठन क्षमता, अनुशासन तथा राष्ट्र-निर्माण के प्रति उनकी अटूट प्रतिबद्धता का उल्लेख करते हुए कहा कि इन्हीं गुणों के कारण उन्हें ‘सरदार’ की उपाधि प्राप्त हुई। राज्यपाल ने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा गुजरात के केवड़िया में स्थापित ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’ का उल्लेख करते हुए कहा कि यह स्मारक सरदार पटेल के राष्ट्रीय एकीकरण में अतुलनीय योगदान को समर्पित एक स्थायी श्रद्धांजलि है तथा ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की भावना का सशक्त प्रतीक भी है। इस अवसर पर राज्यपाल ने ‘वंदे मातरम्’ पर आधारित कॉफी टेबल बुक, ‘दर्शन ऑफ राधाकृष्णन: इटरनल एंड टेम्पोरल’ विषयक संगोष्ठी कार्यवाही तथा डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन पर आधारित बहुभाषी काव्य-संग्रह का विमोचन भी किया। इसके उपरांत उन्होंने ‘वंदे मातरम्: एक यात्रा’ प्रदर्शनी का अवलोकन किया। इस प्रदर्शनी की परिकल्पना एवं क्यूरेशन सुप्रसिद्ध शोधकर्ता एवं लेखक श्री अखिलेश झा द्वारा किया गया है, जबकि सुश्री रश्मिता झा ने सह-क्यूरेटर तथा सुश्री श्रेयसी झा ने शोधकर्ता के रूप में इसमें महत्त्वपूर्ण योगदान दिया है। इससे पूर्व भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान की अध्यक्षा प्रोफेसर शशि प्रभा कुमार ने राज्यपाल का स्वागत करते हुए संस्थान के स्थापना के 60वें वर्ष के उपलक्ष्य में आयोजित वर्षव्यापी कार्यक्रमों की जानकारी दी। उन्होंने सरदार पटेल की एकता एवं संघवाद संबंधी दूरदर्शी सोच को रेखांकित करते हुए भारत के इतिहास और सभ्यतागत विरासत को उसके वास्तविक परिप्रेक्ष्य में प्रस्तुत करने के प्रति संस्थान की प्रतिबद्धता दोहराई। ऑर्गेनाइज़र वीकली के संपादक श्री प्रफुल्ल केतकर ने अपने मुख्य वक्तव्य में सरदार पटेल के एकीकृत भारत के निर्माण में ऐतिहासिक योगदान पर प्रकाश डाला। भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान के निदेशक प्रोफेसर हिमांशु कुमार चतुर्वेदी ने राज्यपाल का स्वागत एवं सम्मान किया तथा प्रदर्शनी और अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी की रूपरेखा से उपस्थित जनसमूह को अवगत कराया। संस्थान के सचिव श्री मेहर चंद नेगी ने धन्यवाद प्रस्ताव प्रस्तुत किया। इस अवसर पर हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय, शिमला के कुलपति प्रोफेसर महावीर सिंह, हिमाचल प्रदेश राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय, घंडल की कुलपति प्रोफेसर प्रीति सक्सेना, प्रधान महालेखाकार श्री पुरुषोत्तम तिवारी, संस्थान के राष्ट्रीय अध्येता, अध्येता, शिक्षाविद् तथा विभिन्न क्षेत्रों की अनेक प्रतिष्ठित हस्तियां उपस्थित थीं।