शिमला, 11 जुलाई(rhnn) : सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज तथा आदरणीय राज पिताजी की असीम कृपा से रोहड़ू मे जोन स्तरीय निरंकारी महिला संत समागम का भव्य आयोजन किया गया । समागम में शिमला जोन के अंतर्गत किन्नौर , रामपुर , रोहडू, चौपाल , शिमला तथा फाइल संयोजक क्षेत्र की विभिन्न शाखाओं सेे बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया। विशाल सत्संग कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए संत निरंकारी मिशन की केन्द्रीय प्रचारक सविता सैनी जी , (चंडीगढ़ ) ने बाबा हरदेव सिंह जी महाराज द्वारा कही गई लाइनों " एक मानो एक को जानो एक हो जाओ" का जिक्र करते हुए कहा कि सभी धार्मिक ग्रंथ मानव जीवन के वास्तविक उद्देश्य को समझाने पर बल देते हैं भक्त मीरा और शबरी का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि भक्त मीराबाई को अध्यात्म और ईश्वर प्राप्ति का ब्रह्म ज्ञान महान संत गुरु रविदास (संत रैदास) से प्राप्त हुआ था। मीराबाई उन्हें अपना गुरु मानती थीं और उन्हीं के मार्गदर्शन से उन्हें आत्मज्ञान की प्राप्ति हुई। जब उन्हें मोक्ष की प्राप्ति हुई तब भक्त मीरा जी के शब्द थे "पायोजी मैंने राम रतन धन पायो "I उन्होंने कहा कि आज सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज भी ब्रह्म ज्ञान प्र्रदान कर रहे है उन्होंने कहा कि मानव योनि सर्वोत्तम है क्योंकि इसी में ईश्वर की प्राप्ति संभव है इसके लिए सतगुरु का मार्गदर्शन अनिवार्य है तथा संत निरंकारी मिशन एक प्यार का मिशन है यह हमें प्रेम ही सिखाता है ।अगर हमें सतगुरु के ब्रह्म ज्ञान पर विश्वास है तो हमें तीन लोक में किसी से भी कोई डर नहीं है और कहा की परिस्थितियों चाहे कैसी भी हो लेकिन मन की स्थिति एक जैसी रहे। समागम के दौरान विभिन्न शाखाओं से आए महात्माओं एवं श्रद्धालुओं ने विचार , समूह गान, एकल गायन के माध्यम से सतगुरु के पावन संदेश को प्रस्तुत किया और आध्यात्मिक वातावरण का सृजन किया । कार्यक्रम के अंत में शिमला जोन के जोनल इंचार्ज आदरणीय कैप्टन एन .पी .एस . भुल्लर जी ने समागम को सफल बनाने में सहयोग देने के लिए मुखी, संयोजक, सेवादल तथा दूर-दूर से आई माताओ और बहनों का आभार तथा धन्यवाद व्यक्त करते हुए मानवता, एकता और प्रेम के संदेश को जीवन में अपनाने का आह्वान किया ।