शिमला, 13 जुलाई(rhnn) : स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई), हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय इकाई ने आज विश्वविद्यालय के कुलपति से एम.एससी. पर्यावरण विज्ञान की प्रवेश प्रक्रिया में पारदर्शिता, मेरिट आधारित प्रवेश तथा सामूहिक निर्णय प्रणाली सुनिश्चित करने की मांग उठाई है। संगठन का कहना है कि वर्तमान प्रवेश प्रक्रिया को लेकर विद्यार्थियों में व्यापक असंतोष है तथा इससे विश्वविद्यालय की निष्पक्ष एवं पारदर्शी प्रवेश व्यवस्था पर गंभीर प्रश्न खड़े हुए हैं। एसएफआई के अनुसार यह विवाद केवल वर्तमान प्रवेश प्रक्रिया तक सीमित नहीं है, बल्कि इसकी पृष्ठभूमि पर्यावरण विज्ञान से संबंधित दो समानांतर विभागों—डिपार्टमेंट ऑफ इंटरडिसिप्लिनरी स्टडीज़ (DIS) तथा डिपार्टमेंट ऑफ एनवायरनमेंटल साइंस—के गठन के बाद उत्पन्न प्रशासनिक एवं शैक्षणिक असमंजस से जुड़ी हुई है। संगठन ने कहा कि वर्ष 2013 से एम.एससी. पर्यावरण विज्ञान का पाठ्यक्रम नियमित रूप से डिपार्टमेंट ऑफ इंटरडिसिप्लिनरी स्टडीज़ के अंतर्गत संचालित होता रहा है, लेकिन बाद में समान विषय के दो विभाग अस्तित्व में आने से अधिकार-क्षेत्र, शिक्षण कार्य और प्रवेश प्रक्रिया को लेकर लगातार भ्रम की स्थिति बनी हुई है।
संगठन ने कहा कि इस प्रशासनिक व्यवस्था के कारण कई नियमित यूजीसी वेतनमान प्राप्त शिक्षक वर्षों से प्रभावी शिक्षण कार्य से वंचित हैं, जबकि दूसरी ओर उन्हीं विषयों के लिए अतिथि शिक्षकों की नियुक्तियां की जाती रही हैं। एसएफआई का कहना है कि नियमित संकाय उपलब्ध होने के बावजूद इस प्रकार की नियुक्तियां विश्वविद्यालय के संसाधनों के प्रभावी उपयोग के अनुरूप नहीं हैं। संगठन ने यह भी कहा कि प्रशासनिक कमियों का समाधान करने के बजाय विद्यार्थियों पर शुल्क वृद्धि का अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालना न्यायसंगत नहीं है।एसएफआई ने मांग की कि पर्यावरण विज्ञान से संबंधित दोनों विभागों के गठन एवं वर्तमान प्रशासनिक व्यवस्था की स्वतंत्र और निष्पक्ष समीक्षा कराई जाए। संगठन ने कहा कि विश्वविद्यालय समुदाय में लंबे समय से इस पुनर्गठन और उससे जुड़े निर्णयों को लेकर विभिन्न प्रश्न उठते रहे हैं। एसएफआई ने स्पष्ट किया कि वह किसी भी आरोप की सत्यता या असत्यता का स्वयं दावा नहीं कर रहा है, बल्कि विश्वविद्यालय की साख, पारदर्शिता और सार्वजनिक विश्वास बनाए रखने के लिए स्वतंत्र जांच की मांग कर रहा है। संगठन ने यह भी कहा कि नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्ट में विश्वविद्यालय की नियुक्तियों से संबंधित अनियमितताओं की ओर संकेत किया गया है, इसलिए प्रशासनिक निर्णयों और विभागीय पुनर्गठन की भी व्यापक समीक्षा आवश्यक है।
वर्तमान प्रवेश प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए एसएफआई ने कहा कि 7 जुलाई 2026 को जारी काउंसलिंग सूचना में आवश्यक दस्तावेजों की सूची प्रकाशित नहीं की गई, जबकि विश्वविद्यालय के अन्य विभागों ने अपने नोटिसों में आवश्यक दस्तावेजों का स्पष्ट उल्लेख किया था। इसके कारण प्रवेश परीक्षा में मेरिट प्राप्त करने वाले कई अभ्यर्थी काउंसलिंग के समय सभी दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सके। संगठन का कहना है कि विद्यार्थियों द्वारा आवश्यक दस्तावेज जमा करने के लिए एक दिन का अतिरिक्त समय देने का अनुरोध किए जाने के बावजूद उस पर विचार नहीं किया गया और प्रवेश सूची जारी कर दी गई। एसएफआई ने यह भी कहा कि उपलब्ध जानकारी के अनुसार प्रवेश सूची विभाग परिषद (Department Council) अथवा विधिवत गठित प्रवेश समिति (Admission Committee) की संस्तुति के बिना अंतिम रूप से जारी की गई। संगठन का मत है कि किसी भी स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम में प्रवेश संबंधी निर्णय किसी एक व्यक्ति के विवेक पर नहीं, बल्कि विभाग परिषद अथवा विधिवत गठित प्रवेश समिति के सामूहिक निर्णय के आधार पर होने चाहिए, ताकि पारदर्शिता, जवाबदेही तथा प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन सुनिश्चित किया जा सके।
एसएफआई ने विश्वविद्यालय प्रशासन से मांग की है कि एम.एससी. पर्यावरण विज्ञान में प्रवेश केवल प्रवेश परीक्षा की मेरिट के आधार पर सुनिश्चित किया जाए, वर्तमान प्रवेश प्रक्रिया की निष्पक्ष समीक्षा कर प्रभावित विद्यार्थियों को न्याय दिया जाए तथा भविष्य में प्रत्येक प्रवेश सूची विभाग परिषद अथवा विधिवत गठित प्रवेश समिति की संस्तुति के बाद ही जारी की जाए। साथ ही विश्वविद्यालय के सभी विभागों के लिए एक समान काउंसलिंग दिशा-निर्देश लागू किए जाएं, जिनमें आवश्यक दस्तावेजों की सूची पूर्व में प्रकाशित करना अनिवार्य हो। संगठन ने यह भी मांग की कि पर्यावरण विज्ञान से संबंधित दो विभागों की वर्तमान प्रशासनिक विसंगति का स्थायी समाधान किया जाए तथा एम.एससी. पर्यावरण विज्ञान का संचालन केवल एक विभाग के माध्यम से किया जाए। नियमित यूजीसी वेतनमान प्राप्त शिक्षकों को तत्काल शिक्षण दायित्व सौंपे जाएं, नियमित संकाय उपलब्ध होने की स्थिति में अनावश्यक अतिथि शिक्षकों की नियुक्ति पर रोक लगाई जाए, विश्वविद्यालय में सामूहिक निर्णय प्रणाली एवं सुशासन को मजबूत किया जाए तथा विद्यार्थियों पर थोपी गई शुल्क वृद्धि तत्काल वापस ली जाए। एसएफआई का स्पष्ट मत है कि विश्वविद्यालय की शैक्षणिक विश्वसनीयता, पारदर्शिता और विद्यार्थियों के हितों की रक्षा के लिए प्रवेश प्रक्रिया पूर्णतः मेरिट आधारित, निष्पक्ष और सामूहिक निर्णय प्रणाली पर आधारित होनी चाहिए। संगठन ने विश्वास व्यक्त किया कि कुलपति इस विषय में व्यक्तिगत हस्तक्षेप कर आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाएंगे।
कुलपति महोदय ने यह आश्वासन दिया है कि सभी छात्रों को जो मेरिट में है उनको डिपार्टमेंट ऑफ़ एन्वायरमेंट साइंस में प्रवेश दिया जाएगा।