नाहन/शिमला, 27 जुलाई (rhnn) : राज्य अंग एवं ऊतक प्रत्यारोपण संगठन (सोटो) हिमाचल प्रदेश द्वारा "अंगदान जीवन संजीवनी अभियान–2026" के अंतर्गत डॉ. यशवंत सिंह परमार गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज, नाहन में एमबीबीएस अंतिम वर्ष के विद्यार्थियों के लिए एक विस्तृत अंगदान जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य भावी चिकित्सकों को अंगदान की वैज्ञानिक, कानूनी एवं नैतिक प्रक्रियाओं से अवगत कराना तथा समाज में अंगदान के प्रति सकारात्मक सोच विकसित करने में उनकी भूमिका को सशक्त बनाना था। कार्यक्रम से पूर्व सोटो की टीम ने मेडिकल कॉलेज की प्राचार्य डॉ. संगीत ढिल्लों से शिष्टाचार भेंट की। इस अवसर पर प्रदेश में चलाए जा रहे "अंगदान जीवन संजीवनी अभियान–2026" की रूपरेखा, उद्देश्य तथा मेडिकल कॉलेजों की भूमिका पर विस्तार से चर्चा की गई। डॉ. संगीत ढिल्लों ने सोटो हिमाचल के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि मेडिकल विद्यार्थियों को अंगदान संबंधी सही एवं वैज्ञानिक जानकारी देना समय की आवश्यकता है। उन्होंने भविष्य में भी इस प्रकार के जन-जागरूकता कार्यक्रमों के आयोजन में पूर्ण सहयोग का आश्वासन दिया। जागरूकता सत्र के दौरान सोटो हिमाचल प्रदेश के स्टेट ट्रांसप्लांट कोऑर्डिनेटर नरेश कुमार ने विद्यार्थियों को अंगदान के महत्व, ब्रेन स्टेम डेथ की अवधारणा, अंग एवं ऊतक प्रत्यारोपण की प्रक्रिया, कानूनी प्रावधानों तथा प्रत्यारोपण समन्वयक की भूमिका के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि एक मृत अंगदाता कई लोगों को नया जीवन दे सकता है तथा कॉर्निया, त्वचा, हड्डियां और अन्य ऊतक दान कर अनेक मरीजों के जीवन की गुणवत्ता में सुधार लाया जा सकता है। उन्होंने बताया कि अंगदान और ऊतकदान के माध्यम से अनेक लोगों को नया जीवन और बेहतर जीवन गुणवत्ता प्रदान की जा सकती है। अंगदान में हृदय, दोनों गुर्दे, यकृत (लीवर), फेफड़े, अग्न्याशय (पैंक्रियाज़) के भाग का दान किया जा सकता है, जबकि ऊतकदान के अंतर्गत नेत्रों की कॉर्निया, त्वचा, हड्डियाँ, टेंडन, लिगामेंट, हृदय के वाल्व, रक्त वाहिकाएँ तथा कार्टिलेज का दान संभव है। एक मृत अंगदाता अपने अंगों के माध्यम से आठ लोगों को नया जीवन दे सकता है, जबकि ऊतकदान से अनेक अन्य मरीजों के जीवन की गुणवत्ता में सुधार किया जा सकता है। इसलिए अंगदान और ऊतकदान न केवल एक महान मानवीय कार्य है, बल्कि जरूरतमंद मरीजों के लिए जीवन की नई आशा भी है। कार्यक्रम में सोटो की आईईसी एवं मीडिया कंसल्टेंट रामेश्वरी ने विद्यार्थियों को अंगदान से जुड़ी भ्रांतियों और तथ्यों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि समाज में आज भी अंगदान को लेकर अनेक गलत धारणाएं मौजूद हैं, जिन्हें वैज्ञानिक जानकारी और जनजागरूकता के माध्यम से दूर किया जा सकता है। उन्होंने विद्यार्थियों से आग्रह किया कि वे भविष्य में चिकित्सक बनने के साथ-साथ अंगदान के सशक्त प्रेरक भी बनें तथा अपने मरीजों और समाज को सही जानकारी देकर अधिक से अधिक लोगों को इस महादान के लिए प्रेरित करें। कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों ने अंगदान से जुड़े विभिन्न विषयों पर प्रश्न पूछे, जिनका सोटो टीम द्वारा वैज्ञानिक एवं व्यावहारिक दृष्टिकोण से उत्तर दिया गया। विद्यार्थियों ने अंगदान के महत्व को समझते हुए भविष्य में इस जनहित अभियान से सक्रिय रूप से जुड़ने की प्रतिबद्धता भी व्यक्त की। सोटो हिमाचल प्रदेश ने बताया कि "अंगदान जीवन संजीवनी अभियान–2026" के तहत प्रदेश के विभिन्न मेडिकल कॉलेजों, शिक्षण संस्थानों एवं अन्य संगठनों में लगातार जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं, ताकि अधिक से अधिक लोग अंगदान के प्रति जागरूक होकर इस जीवनदायी अभियान का हिस्सा बन सकें। इस दौरान कॉलेज की एकेडमिक कॉर्डिनेटर (छात्र) डॉ अर्चना, सर्जरी विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ पुनीत जैन और डॉ रविकांत मौजूद रहे। कार्यक्रम के दौरान जीएनएम की छात्राओं को अंगदान एवं नेत्रदान अभियान में नर्सिंग स्टाफ की महत्वपूर्ण भूमिका के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। उन्हें बताया गया कि नर्सिंग स्टाफ मरीजों और उनके परिजनों के सबसे निकट होता है, इसलिए अंगदान और नेत्रदान के प्रति सही जानकारी पहुंचाने, भ्रांतियों को दूर करने, संभावित दाताओं की पहचान करने तथा दान की प्रक्रिया के दौरान समन्वय स्थापित करने में उनकी भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। छात्राओं को प्रेरित किया गया कि वे अपने व्यावसायिक जीवन में अंगदान एवं नेत्रदान के प्रति संवेदनशीलता और जागरूकता का संदेश समाज तक पहुंचाकर अधिक से अधिक लोगों को इस जीवनदायी महादान से जोड़ने में सक्रिय योगदान दें।