कार्यक्रम में हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति एवं राज्यसभा सांसद सिकंदर कुमार मुख्य अतिथि रहे, जबकि अध्यक्षता आरएसएस हिमाचल प्रांत के संघचालक वीर सिंह रांगड़ा ने की। मुख्य वक्ता आरएसएस के उत्तर क्षेत्र प्रचारक प्रमुख बनवीर ने कहा कि 1925 में नागपुर से शुरू हुई व्यक्ति निर्माण की साधना को हिमाचल में आगे बढ़ाने में इन कार्यकर्ताओं ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने कहा कि स्व. कुंज लाल ठाकुर ने भारत विभाजन के दौरान कश्मीर में हिंदुओं को संगठित करने में अहम योगदान दिया, जबकि स्व. किशन चंद राजपूत ने साधनों के अभाव के बावजूद संघ कार्य के साथ जरूरतमंदों की सेवा और न्याय के लिए संघर्ष किया।
सिकंदर कुमार ने कहा कि नई पीढ़ी को सही दिशा देने की जरूरत है। केवल डॉक्टर या इंजीनियर बनना पर्याप्त नहीं, बल्कि देशभक्ति, सद्चरित्र और बेहतर व्यवहार से ही देश प्रगति के पथ पर आगे बढ़ सकता है। उन्होंने पुस्तक को प्रेरणादायी बताते हुए लेखक और मातृवंदना संस्थान के प्रयासों की सराहना की। संघ प्रांत प्रचार प्रमुख प्रताप समयाल ने पुस्तक की पृष्ठभूमि रखी। इस अवसर पर मातृवंदना के अध्यक्ष उमेश मोदगिल, लेखक डॉ. कर्म सिंह, गोविंद ठाकुर और वीरेंद्र सपेइया सहित अन्य मौजूद रहे।