उन्होंने कहा कि निंदा, अहंकार और द्वेष मनुष्य की आध्यात्मिक उन्नति में सबसे बड़ी बाधाएं हैं। यदि व्यक्ति प्रेम, विनम्रता और सद्भाव को अपने जीवन का आधार बनाए तो वह आत्मिक शांति और जीवन के वास्तविक उद्देश्य को प्राप्त कर सकता है। उन्होंने श्रद्धालुओं से नियमित रूप से सत्संग से जुड़े रहने और गुरु के बताए मार्ग पर चलने का आह्वान किया। उनके अनुसार गुरु की शरण ही आत्मिक उत्थान और जीवन में सकारात्मक परिवर्तन का सबसे प्रभावी माध्यम है। गुरु पूर्णिमा के अवसर पर श्रद्धालुओं ने विशेष भक्ति और सेवा भाव के साथ कार्यक्रम में भाग लिया। सत्संग के बाद विशाल लंगर का आयोजन किया गया, जिसमें हजारों लोगों ने प्रसाद ग्रहण किया। इसके साथ ही श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए नि:शुल्क स्वास्थ्य जांच शिविर भी लगाया गया, जहां विशेषज्ञ चिकित्सकों ने स्वास्थ्य परीक्षण कर आवश्यक परामर्श दिया।