योजना के तहत हर जिले से उसकी विशेषता और बाजार क्षमता के आधार पर तीन प्रमुख उत्पादों का चयन किया जाएगा। वैल्यू चेन विश्लेषण के बाद इन उत्पादों की ब्रांडिंग, पैकेजिंग, गुणवत्ता सुधार और विपणन पर विशेष ध्यान दिया जाएगा, ताकि किसानों, शिल्पकारों और छोटे उत्पादकों को बेहतर कीमत और नए बाजार मिल सकें। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि प्रदेश को आत्मनिर्भर बनाने का सरकार का संकल्प इस ग्रामीण-केंद्रित पहल के माध्यम से और मजबूत होगा। नई औद्योगिक नीति के जरिए भी इस योजना को सहयोग दिया जाएगा। उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान ने कहा कि सरकार जिला स्तर के उत्पादों को बढ़ावा देकर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई ऊर्जा देने और रोजगार के अवसर बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है।
योजना में हल्दी, अदरक, मक्का, कांगड़ा चाय, कांगड़ा चित्रकला, गुच्छी, चुल्ली का तेल, चंबा चप्पल, कुल्लू और किन्नौर शॉल सहित कृषि, बागवानी, हथकरघा और हस्तशिल्प से जुड़े अनेक उत्पाद शामिल किए जाएंगे। सरकार का लक्ष्य महिला उद्यमियों, स्वयं सहायता समूहों, शिल्पकारों और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों को सशक्त बनाते हुए हिमाचल के स्थानीय उत्पादों को वैश्विक पहचान दिलाना है।