उन्होंने कहा कि प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों के हस्तशिल्प, कृषि एवं बागवानी उत्पादों की उचित पैकेजिंग और ब्रांडिंग के साथ उन्हें राष्ट्रीय बाजार उपलब्ध करवाने की दिशा में कार्य किया जाना आवश्यक है। इससे स्थानीय उत्पादों की गुणवत्ता एवं पहचान को बढ़ावा मिलेगा और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार एवं स्वरोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे। कैबिनेट मंत्री ने कहा कि वर्तमान समय में कैंसर, उच्च रक्तचाप और मधुमेह जैसी जीवनशैली से जुड़ी बीमारियां बड़ी चुनौती बन रही हैं। ऐसे में जैविक एवं प्राकृतिक उत्पादों की मांग और महत्व लगातार बढ़ रहा है। लोगों में जैविक उत्पादों के प्रति जागरूकता बढ़ने के कारण प्रदेश की महिलाओं और स्वयं सहायता समूहों के लिए यह एक महत्वपूर्ण अवसर है। उन्होंने स्वयं सहायता समूहों से आग्रह किया कि वे जैविक उत्पादों को बढ़ावा देने के साथ-साथ उनके स्वास्थ्यवर्धक गुणों एवं उपयोगिता के बारे में उपभोक्ताओं को जागरूक करें। उत्पादों की गुणवत्ता, पैकेजिंग और विपणन पर विशेष ध्यान देकर वे अपनी आय में वृद्धि करने के साथ-साथ प्रदेश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूत करने में योगदान दे सकते हैं। विक्रमादित्य सिंह ने ई-मार्ट की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि प्रदेश सरकार की ओर से इसे सफल बनाने के लिए हरसंभव सहयोग प्रदान किया जाएगा। उन्होंने कहा कि प्रदेश के स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने और अधिक से अधिक महिलाओं को आर्थिक गतिविधियों से जोड़ने के लिए सरकार प्रतिबद्ध है।
उन्होंने कहा कि प्रदेश के मुख्यमंत्री ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार के अवसर बढ़ाने के लिए निरंतर प्रयासरत हैं। इसी दिशा में ई-मार्ट की यह पहल एक सराहनीय कदम है। उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले समय में इसके सकारात्मक परिणाम सामने आएंगे और यह पहल महिलाओं तथा ग्रामीण समाज के लिए लाभकारी सिद्ध होगी। ई-मार्ट के संस्थापक अरुण वर्मा ने कहा कि यह प्लेटफार्म केवल हिमाचल प्रदेश तक सीमित नहीं रहेगा और उत्तर भारत के विभिन्न क्षेत्रों को इससे जोड़ा जा चुका है। उन्होंने कहा कि प्लेटफार्म के माध्यम से शहरों में गांवों के विभिन्न स्थानीय उत्पाद उपलब्ध करवाने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि घी, दालें, हल्दी, गोबर के उपले और गौमूत्र सहित विभिन्न ग्रामीण उत्पादों को ऑनलाइन बाजार उपलब्ध करवाया जाएगा। उत्पादों की देशभर में आपूर्ति के लिए ब्लू डार्ट को डिलीवरी पार्टनर बनाया गया है। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं को घर बैठे कच्चा माल उपलब्ध करवाकर उन्हें उत्पाद तैयार करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। उन्होंने बताया कि ऐसे ग्रामीण व्यवसायी, जो एफएसएसएआई अथवा जीएसटी जैसी औपचारिकताएं पूरी करने में सक्षम नहीं हैं, वे भी प्लेटफार्म के माध्यम से अपने उत्पादों को बाजार तक पहुंचाने का अवसर प्राप्त कर सकेंगे। अरुण वर्मा ने कहा कि इस पहल का उद्देश्य उत्पादकों को अपनी पहचान के साथ सीधे उपभोक्ताओं तक पहुंचाना है, जिससे बिचौलियों की भूमिका कम होगी और उत्पादकों को उनके सामान का बेहतर मूल्य मिल सकेगा। उन्होंने बताया कि वर्तमान में प्रदेश के 11 जिलों की लगभग 2500 महिलाएं इस पहल से जुड़ चुकी हैं। इस अवसर पर उपमहापौर उमा कौशल, आयुक्त नगर निगम शिमला सचिन कंवल, सदस्य राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग मोनिता चौहान, कांग्रेस जिला अध्यक्ष शिमला इंद्रजीत सिंह, ब्लॉक कांग्रेस टूटू के अध्यक्ष देवेंद्र सिंह सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।