बिलासपुर/शिमला, 25 अगस्त (rhnn) : स्टेम डेथ की समय पर पहचान और नियमानुसार घोषणा के बाद मृतक अंगदान के जरिए कई जरूरतमंद मरीजों को जीवनदान मिल सकता है। इसी उद्देश्य से स्टेट ऑर्गन एंड टिश्यू ट्रांसप्लांट ऑर्गेनाइजेशन (SOTTO) हिमाचल प्रदेश और एम्स बिलासपुर के नेफ्रोलॉजी विभाग के संयुक्त तत्वावधान में मंगलवार को ब्रेन स्टेम डेथ पर एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित की गई। इसमें ब्रेन स्टेम डेथ की पहचान, संभावित अंगदाताओं के प्रबंधन और अंगदान प्रक्रिया को प्रभावी बनाने पर विशेषज्ञों ने मंथन किया। कार्यक्रम के मुख्यातिथि एम्स बिलासपुर के कार्यकारी निदेशक लेफ्टिनेंट जनरल (डॉ.) दलजीत सिंह ने कहा कि ऐसे मामलों की समयबद्ध पहचान और प्रशिक्षित मेडिकल टीम की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने चिकित्सा संस्थानों में अंगदान एवं प्रत्यारोपण व्यवस्था को मजबूत करने के लिए नियमित प्रशिक्षण पर जोर दिया। SOTTO हिमाचल प्रदेश के नोडल अधिकारी एवं IGMC शिमला के सर्जरी विभागाध्यक्ष प्रो. (डॉ.) पुनीत महाजन ने प्रदेश में अंगदान व्यवस्था केFT विकास की जानकारी दी। वहीं PGI चंडीगढ़ के विशेषज्ञों ने ब्रेन स्टेम डेथ की पहचान व घोषणा, ICU में संभावित अंगदाताओं के प्रबंधन तथा मृतक अंगदान कार्यक्रम विकसित करने के तकनीकी पहलुओं पर व्याख्यान दिए। विशेषज्ञों ने कहा कि अस्पतालों में चिकित्सकों और नर्सिंग स्टाफ का नियमित प्रशिक्षण, संभावित अंगदाताओं की समय पर पहचान और विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय जरूरी है। कार्यक्रम के अंत में SOTTO हिमाचल प्रदेश के ज्वाइंट डायरेक्टर डॉ. निशांत नड्डा ने सभी विशेषज्ञों और प्रतिभागियों का आभार जताया।