राजेश शर्मा ने बताया कि परियोजना के लिए समग्र शिक्षा की ओर से तीन बसें खरीदी गई हैं। इन्हें मोबाइल रिसोर्स सेंटर के रूप में विकसित कर आवश्यक थेरेपी उपकरणों और संसाधनों से सुसज्जित किया जाएगा। इनके माध्यम से विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को फिजियोथेरेपी, ऑक्यूपेशनल थेरेपी, स्पीच एवं लैंग्वेज थेरेपी, विशेष शिक्षा, असेसमेंट, काउंसलिंग और पुनर्वास सेवाएं उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाएगा। उन्होंने कहा कि हिमाचल की कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में दूरदराज क्षेत्रों तक विशेषज्ञ सेवाएं पहुंचाना चुनौतीपूर्ण है। ऐसे में ‘थेरेपी ऑन व्हील्स’ उन बच्चों के लिए मददगार साबित होगी, जो दूरी और परिवहन संबंधी समस्याओं के कारण नियमित रूप से विशेषज्ञ सेवाओं तक नहीं पहुंच पाते। परियोजना को प्रारंभिक रूप से एक वर्ष के लिए संचालित किया जाएगा। इस दौरान बच्चों की पहचान व स्क्रीनिंग, आवश्यकता आधारित असेसमेंट, जागरूकता, प्रशिक्षण और अभिभावकों व शिक्षकों को मार्गदर्शन भी दिया जाएगा। परियोजना के परिणामों के आधार पर भविष्य में इसे अन्य क्षेत्रों तक विस्तार देने पर विचार किया जाएगा।