उन्होंने कहा कि जिले की 19 संवेदनशील पंचायतों को रेड जोन से येलो जोन में लाना प्रशासन की प्राथमिकता है। इसके लिए संबंधित विभागों के अधिकारी आपसी समन्वय से ठोस कार्ययोजना एवं प्रारूप तैयार करें और उसके अनुरूप प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करें। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि पंचायत स्तर पर नशे के स्रोत, नशे के कारोबार से जुड़े मामलों तथा युवाओं को जागरूक करने के लिए नियमित गतिविधियां आयोजित की जाएं। उपायुक्त ने कहा कि जिले के स्कूलों में विद्यार्थियों को नशे के दुष्प्रभावों से बचाने और उनमें अनुशासन की भावना विकसित करने के लिए सेवानिवृत्त सैनिकों एवं पूर्व सैन्य अधिकारियों की सेवाएं ली जाएंगी। उन्होंने कहा कि सेना में लंबे समय तक अनुशासन, जिम्मेदारी, कठिन परिस्थितियों और चुनौतियों का सामना करने वाले सेवानिवृत्त सैनिक विद्यार्थियों को अपने अनुभवों के माध्यम से प्रेरित कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि इस उद्देश्य से जिला स्तर पर सेवानिवृत्त सेना अधिकारियों एवं सैनिकों की सूची तैयार की जा चुकी है। सूची में शामिल सभी सेवानिवृत्त सैनिकों एवं अधिकारियों ने विद्यार्थियों के बीच जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करने के लिए अपनी सहमति प्रदान की है।
यह सूची जिले के सभी स्कूलों को उपलब्ध करवाई जाएगी। इस सूची में सेवानिवृत्त सैनिकों के मोबाइल नंबर और एड्रेस भी शामिल है। संबंधित स्कूलों के प्रधानाचार्य सूची में शामिल किसी भी सेवानिवृत्त सैनिक अथवा सैन्य अधिकारी को अपने विद्यालय में आमंत्रित कर विद्यार्थियों के लिए जागरूकता कार्यक्रम आयोजित कर सकेंगे। इन कार्यक्रमों में विद्यार्थियों को नशे से दूर रहने, जीवन में अनुशासन अपनाने, लक्ष्य निर्धारित करने, कठिन परिस्थितियों का सामना करने तथा सकारात्मक सोच विकसित करने के लिए प्रेरित किया जाएगा। उपायुक्त ने कहा कि सेवानिवृत्त सैनिकों के अनुभवों का विद्यार्थियों के साथ साझा होना एक प्रभावी पहल साबित हो सकता है। इससे न केवल विद्यार्थियों को लाभ मिलेगा, बल्कि उनके माध्यम से परिवारों और समाज में भी नशे के खिलाफ सकारात्मक संदेश पहुंचेगा। उपायुक्त ने जिले में नशे के खिलाफ पुलिस द्वारा की जा रही कार्रवाई की सराहना करते हुए कहा कि पुलिस विभाग द्वारा इस दिशा में बेहतरीन कार्य किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि नशे के खिलाफ कार्रवाई के दौरान अब तक लगभग 8 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की जा चुकी है।
उन्होंने कहा कि इस वर्ष जिले में NDPS एक्ट के तहत 556 मामले दर्ज किए गए हैं। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि नशे के खिलाफ कानूनी कार्रवाई के साथ-साथ नशा निवारण एवं पुनर्वास से संबंधित जागरूकता गतिविधियों पर भी विशेष ध्यान दिया जाए। उपायुक्त ने निर्देश दिए कि जिला में नशा निवारण से संबंधित बैठकें नियमित रूप से आयोजित की जाएं और विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करते हुए नशे के खिलाफ अभियान को और प्रभावी बनाया जाए। उन्होंने कहा कि नशे की समस्या से निपटने के लिए केवल पुलिस कार्रवाई पर्याप्त नहीं है, बल्कि प्रशासन, शिक्षा विभाग, पंचायत प्रतिनिधियों, सामाजिक संस्थाओं, अभिभावकों और आम जनता की सामूहिक भागीदारी जरूरी है। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि नशे के खिलाफ जागरूकता अभियान को जमीनी स्तर तक पहुंचाया जाए तथा युवाओं को खेल, शिक्षा, रचनात्मक गतिविधियों और सकारात्मक जीवनशैली से जोड़ने के लिए भी प्रभावी प्रयास किए जाएं। बैठक में अतिरिक्त जिला दंडाधिकारी (कानून एवं व्यवस्था) पंकज शर्मा, अतिरिक्त जिला दंडाधिकारी (प्रोटोकॉल) ज्ञान सागर नेगी, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक गौरव जीत सिंह, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अमित ठाकुर सहित जिले के सभी उपमंडलाधिकारी नागरिक (एसडीएम), खंड विकास अधिकारी, तहसीलदार तथा अन्य संबंधित अधिकारी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से उपस्थित रहे।