उन्होंने कहा कि मनरेगा जैसे मुद्दों पर मुख्यमंत्री और मंत्री स्वयं धरनों में बैठे दिखाई दिए, जो लोकतांत्रिक व्यवस्था में असामान्य स्थिति है। बिंदल ने कहा कि हालिया विधानसभा सत्र में भी सत्तारूढ़ दल के विधायक और मंत्री तख्तियां लेकर सदन से बाहर आए और नारेबाजी करते हुए धरने पर बैठ गए, जबकि यह भूमिका सामान्यतः विपक्ष की होती है। उन्होंने कहा कि प्रदेश की जनता सड़क, स्वास्थ्य, रोजगार और विकास की प्रतीक्षा कर रही है, लेकिन सरकार इन मूल मुद्दों से ध्यान हटाकर केवल राजनीतिक नारों में व्यस्त है।
उन्होंने कहा कि यदि सरकार को विरोध की राजनीति ही करनी है तो सत्ता छोड़कर विपक्ष की भूमिका निभाए, लेकिन शासन करते हुए जनता को परेशान करना उचित नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार अपनी चुनावी गारंटियों को पूरा करने में असफल रही है और अब जिम्मेदारी से बचने के लिए राजनीतिक मुद्दे खड़े कर रही है। राजीव बिंदल ने कहा कि भाजपा का प्रशिक्षण अभियान संगठन को नई ऊर्जा देगा और कार्यकर्ताओं को वैचारिक स्पष्टता तथा संगठनात्मक दक्षता प्रदान करेगा। उन्होंने विश्वास जताया कि मजबूत संगठन, प्रशिक्षित कार्यकर्ता और जनसमर्थन के बल पर भाजपा आने वाले चुनावों में पूरी ताकत से उतरेगी और प्रदेश हित के मुद्दों को मजबूती से उठाती रहेगी।