आर्ट क्वालिटी के प्रधान ने कहा कि शिक्षा को व्यापार का माध्यम नहीं बनाया जा सकता। उन्होंने आरोप लगाया कि हॉस्टल फीस, परीक्षा शुल्क, बस किराया और अन्य खर्चों में लगातार बढ़ोतरी छात्रों और अभिभावकों की परेशानियां बढ़ा रही है। साथ ही सरकार द्वारा शिक्षा बजट में कटौती किए जाने की भी आलोचना की गई। एसएफआई ने मांग की कि फीस वृद्धि का प्रस्ताव तुरंत वापस लिया जाए। संगठन ने चेतावनी दी कि यदि फैसला वापस नहीं हुआ तो विश्वविद्यालय स्तर पर उग्र आंदोलन किया जाएगा।