प्रतियोगिता का शुभारंभ राजकीय कन्या महाविद्यालय शिमला की प्राचार्या डॉ. अनुरीता सक्सेना ने बतौर मुख्य अतिथि किया। उन्होंने कहा कि शूटिंग महज खेल नहीं, बल्कि एकाग्रता, अनुशासन, धैर्य और आत्म नियंत्रण का संगम है। निशानेबाज जब लक्ष्य साधता है तो उसकी सांस, धड़कन और आंखें एक ही लक्ष्य पर केंद्रित होती हैं। यही फोकस जीवन में सफलता की राह भी आसान करता है।
उन्होंने कहा कि चैंपियनशिप में छात्राओं की भागीदारी उत्साहजनक है। बेटियां आज हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं। उन्होंने प्रतिभागियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि मेडल से अधिक महत्वपूर्ण खेल और खेल भावना है। इस अवसर पर सूर्य प्रताप सिंह बांशटु, पर्यवेक्षक प्रो. विक्रांत, अंतरराष्ट्रीय क्वालिफाइड जज रविंद्र कुमार, राइफल एसोसिएशन के पदाधिकारी और विभिन्न महाविद्यालयों के टीम प्रभारी मौजूद रहे।