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लक्कड़ बाजार में तहबाजारियों को उजाड़ने के खिलाफ सीटू का जोरदार प्रदर्शन

शिमला, 07 सितंबर (rhnn) : शिमला नगर निगम द्वारा तहबाजारियों, रेहड़ी-फड़ी वालों और छोटे कारोबारियों को उजाड़ने की कार्रवाई के खिलाफ आज लक्कड़ बाजार में तहबाजारी यूनियन संबंधित सीटू के बैनर तले जोरदार प्रदर्शन किया गया। बड़ी संख्या में तहबाजारी लक्कड़ बाजार में एकत्रित हुए और नगर निगम प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शन के दौरान तहबाजारियों ने स्पष्ट किया कि वे अपने परिवारों की रोजी-रोटी बचाने के लिए किसी भी कीमत पर संघर्ष से पीछे नहीं हटेंगे। तहबजारी ने इस दौरान लक्कड़ बाजार में अपनी तहबाजारी सजाकर अपना सामान बेचा। प्रदर्शन के दौरान नगर निगम प्रशासन और तहबाजारियों के बीच तीखा टकराव देखने को मिला। पुलिस बल की मौजूदगी के बावजूद तहबाजारियों ने लक्कड़ बाजार में अपनी दुकानें लगाकर यह संदेश दिया कि बिना वैकल्पिक और सम्मानजनक वेंडिंग व्यवस्था किए उन्हें उजाड़ने की कार्रवाई स्वीकार नहीं की जाएगी। मौके पर काफी तनावपूर्ण स्थिति बनी रही।

सीटू प्रदेशाध्यक्ष विजेंद्र मेहरा, महासचिव प्रेम गौतम, जिला शिमला सचिव अमित कुमार, जिला कोषाध्यक्ष बालक राम व विवेक कश्यप ने कहा कि नगर निगम प्रशासन गरीब मेहनतकशों की रोजी-रोटी छीनने पर आमादा है। वर्षों से शिमला शहर में रेहड़ी-फड़ी और तहबाजारी के माध्यम से हजारों परिवार अपनी आजीविका चला रहे हैं। इन लोगों को अतिक्रमणकारी या शहर की समस्या के रूप में देखने के बजाय उनके रोजगार और अधिकारों की रक्षा करना नगर निगम तथा सरकार की जिम्मेदारी है। विडंबना यह है कि लक्कड़ बाजार में सिंकिंग जोन, लोगों को आवाजाही व ट्रैफिक जाम की बुनियाद पर टीवीसी सदस्यों की इजाजत के बिना व इनकी मौजूदगी में वीडियोग्राफी न करने के बाबजूद तहबाजारी को हटाकर उक्त स्थान को नगर निगम शिमला ने अपनी भारी भरकम गाड़ियों के लिए पार्किंग स्थल बना दिया है जिसे न तो लोगों की आवाजाही प्रभावित हो रही है, न ही ट्रैफिक जाम लग रहा है और न ही जमीन धंस रही है। अपने ही बेमानी तर्कों पर नगर निगम का तहबजारी व गरीब विरोधी नजरिया बेनकाब हो गया है। इसलिए पहले की तर्ज पर लक्कड़ बाजार को वैंडिंग जोन में ही रखा जाए।

उन्होंने कहा कि यदि नगर निगम प्रशासन को किसी स्थान पर यातायात, अग्नि सुरक्षा अथवा अन्य सार्वजनिक व्यवस्था से संबंधित समस्या है तो उसका समाधान बातचीत और वैज्ञानिक तरीके से किया जाना चाहिए। लेकिन रोजगार छीनकर किसी गरीब परिवार को सड़क पर छोड़ देना किसी भी हालत में समाधान नहीं है। तहबाजारियों की स्पष्ट मांग है कि जिन स्थानों से उन्हें हटाया जा रहा है, वहां से पहले उन्हें ऐसी वैकल्पिक जगह उपलब्ध करवाई जाए जहां पर्याप्त ग्राहक आवाजाही हो और वे सम्मानपूर्वक अपना कारोबार चला सकें। केवल ऐसे स्थान पर भेज देना जहां ग्राहक ही नहीं पहुंचते, वस्तुतः रोजगार खत्म करने के बराबर है। नगर निगम द्वारा आजीविका भवन की छत व भज्जी हाउस सहित अन्य स्थानों पर तहबाजारियों को स्थान देने की व्यवस्था पर भी यूनियन लगातार सवाल उठाती रही है। तहबाजारियों का कहना है कि यदि वहां से पर्याप्त रोजगार की संभावना होती तो वे स्वयं वहां जाकर कारोबार करना पसंद करते। पिछले कई सप्ताह से कार्रवाई के कारण अनेक परिवारों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। स्ट्रीट वेंडर्स एक्ट लागू करने की मांग। सीटू ने कहा कि तहबाजारियों के अधिकारों को स्ट्रीट वेंडर्स (प्रोटेक्शन ऑफ लाइवलीहुड एंड रेगुलेशन ऑफ स्ट्रीट वेंडिंग) एक्ट, 2014 के प्रावधानों के तहत सुनिश्चित किया जाना चाहिए। यूनियन लंबे समय से सभी पात्र तहबाजारियों का सर्वेक्षण एवं पंजीकरण, वेंडिंग प्रमाणपत्र जारी करने तथा पर्याप्त वेंडिंग जोन विकसित करने की मांग कर रही है।

साथ ही मनमाने चालान, सामान जब्त करने और प्रशासनिक उत्पीड़न को बंद करने की मांग भी लगातार उठाई जा रही है। उन्होंने कहा कि अगस्त में भी तहबाजारियों ने नगर निगम की कार्रवाई के खिलाफ कई बार प्रदर्शन किए हैं और प्रशासन से बातचीत के जरिए स्थायी समाधान निकालने की मांग की है। बावजूद इसके समस्या का समाधान करने के बजाय लगातार कार्रवाई करना यह दर्शाता है कि नगर निगम गरीबों की रोजी-रोटी के प्रति संवेदनशील नहीं है। शहर की सुंदरता के नाम पर गरीबों का रोजगार नहीं छीना जा सकता। सीटू ने कहा कि शिमला की सुंदरता और व्यवस्थित यातायात की आवश्यकता से किसी को भी इनकार नहीं है, लेकिन शहर की सुंदरता का अर्थ यह नहीं हो सकता कि गरीबों और छोटे कारोबारियों को शहर से ही बाहर कर दिया जाए। सीटू के अनुसार तहबाजारियों के लिए भी सम्मानजनक रोजगार की व्यवस्था की जा सकती है। छोटे विक्रेता शहर की अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं और स्थानीय जनता तथा पर्यटकों को सस्ती वस्तुएं एवं सेवाएं उपलब्ध करवाते है।

उन्होंने नगर निगम प्रशासन को चेतावनी दी कि दमन, चालान, सामान जब्ती और पुलिस बल के इस्तेमाल से तहबाजारियों का आंदोलन नहीं दबाया जा सकता। प्रशासन को टकराव का रास्ता छोड़कर यूनियन और तहबाजारियों के प्रतिनिधियों के साथ तत्काल बातचीत करनी चाहिए। सीटू ने मांग की है कि तहबाजारियों को उजाड़ने की कार्रवाई तत्काल बंद की जाए। बिना वैकल्पिक व्यवस्था के किसी भी तहबाजारी को न हटाया जाए। सभी पात्र तहबाजारियों का सर्वेक्षण एवं पंजीकरण पूरा किया जाए। पात्र तहबाजारियों को तत्काल वेंडिंग सर्टिफिकेट जारी किए जाएं। पर्याप्त संख्या में व्यवहारिक और ग्राहक-आवागमन वाले वेंडिंग स्थल चिन्हित किए जाएं। सामान जब्त करने, मनमाने चालान और प्रशासनिक उत्पीड़न पर रोक लगाई जाए। स्ट्रीट वेंडर्स एक्ट, 2014 के प्रावधानों को पूरी तरह लागू किया जाए। तहबाजारी यूनियन के प्रतिनिधियों को विश्वास में लेकर स्थायी समाधान निकाला जाए। लंबे समय से रोजगार से वंचित तहबाजारियों को तत्काल कारोबार करने की अनुमति दी जाए। लक्कड़ बाजार सहित पूरे शिमला में तहबाजारियों के पुनर्वास की स्पष्ट और पारदर्शी नीति बनाई जाए। उन्होंने कहा कि आज लक्कड़ बाजार में हुआ प्रदर्शन केवल एक स्थान पर दुकान लगाने का सवाल नहीं है, बल्कि यह हजारों मेहनतकश परिवारों के जीवन और रोजगार की लड़ाई है। जब तक तहबाजारियों के लिए न्यायपूर्ण समाधान नहीं निकाला जाता, तब तक संघर्ष जारी रहेगा। सीटू ने नगर निगम प्रशासन से टकराव का रास्ता छोड़कर तत्काल बातचीत शुरू करने और तहबाजारियों के रोजगार की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है। साथ ही चेतावनी दी कि यदि उजाड़ने की कार्रवाई जारी रही तो आंदोलन को और व्यापक एवं उग्र किया जाएगा।

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