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पेंशनरों की बकाया राशि को लेकर सरकार की घोषणा पर भड़की एसोसिएशन, कहा- ‘आटे में नमक के बराबर’

शिमला, 16 अगस्त (rhnn) : पेंशनर्स वेलफेयर एसोसिएशन हिमाचल प्रदेश की शिमला शहरी इकाई ने प्रदेश सरकार की ओर से पेंशनरों की देय राशि के भुगतान को लेकर की गई घोषणा पर कड़ा रोष जताया है। रविवार को शिमला में शहरी इकाई की विशेष बैठक प्रधान मदन लाल शर्मा की अध्यक्षता में आयोजित हुई। बैठक में सरकार द्वारा तृतीय श्रेणी के पेंशनरों को 30 प्रतिशत तथा द्वितीय एवं प्रथम श्रेणी के पेंशनरों को 15 प्रतिशत देय राशि का भुगतान करने की घोषणा की आलोचना की गई। एसोसिएशन ने प्रस्ताव पारित कर कहा कि सरकार की यह घोषणा पेंशनरों की वास्तविक देनदारियों की तुलना में ‘आटे में नमक के बराबर’ है। पदाधिकारियों ने कहा कि प्रदेश सरकार के चार वर्ष पूरे होने जा रहे हैं, लेकिन बुजुर्ग पेंशनरों की लंबित देनदारियों का पूर्ण भुगतान करने के बजाय अभी भी सरकार की ओर से टालमटोल की जा रही है।

एसोसिएशन ने सरकार से आग्रह किया कि अगस्त में की गई घोषणा के तहत पेंशनरों की देनदारियों से संबंधित अधिसूचना जारी करते समय बकाया राशि का पूर्ण भुगतान करने को प्राथमिकता दी जाए और सरकार अपने वादे पर खरा उतरे। महासचिव सुभाष वर्मा ने कहा कि बैठक में केंद्र सरकार के पेंशनरों के समान प्रदेश के पेंशनरों को लंबित 15 प्रतिशत महंगाई राहत (डीआर) की किस्तें तुरंत जारी करने की मांग भी उठाई गई। उन्होंने कहा कि वर्तमान में हिमाचल के पेंशनरों को केंद्र सरकार के पेंशनरों की तुलना में 15 प्रतिशत कम महंगाई राहत मिल रही है। एसोसिएशन पदाधिकारियों ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने पेंशनरों की बकाया राशि और लंबित 15 प्रतिशत महंगाई राहत की किस्तों को शीघ्र जारी नहीं किया तो बुजुर्ग पेंशनर व्यापक आंदोलन का रास्ता अपनाने के लिए मजबूर होंगे। उन्होंने कहा कि जीवन के अंतिम पड़ाव में पहुंच चुके बुजुर्गों को अपने हक की लड़ाई के लिए सड़कों पर उतरना पड़े, इससे दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति और कुछ नहीं हो सकती।

बैठक में प्रधान मदन लाल शर्मा, वरिष्ठ उपप्रधान दीप राम शर्मा, उपप्रधान मीरा ठाकुर, महासचिव सुभाष वर्मा सहित विजय ठाकुर, पूर्ण चंद शर्मा, नारायण दास, रमेश ठाकुर, अनिल जसवाल और नंदलाल शर्मा सहित अन्य पदाधिकारी मौजूद रहे। एसोसिएशन ने कहा कि जिन पेंशनरों से सरकार अपने अधिकारों और जिम्मेदारियों को पूरा करने की उम्मीद करती है, उन्होंने अपना पूरा जीवन प्रदेश के विकास और सेवा में समर्पित किया है। ऐसे में उनकी जायज बकाया देनदारियों का भुगतान सरकार की प्राथमिकता होनी चाहिए।

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