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शहीद दिवस, देश के प्रति अपने कर्तव्यों को निभाने की प्रेरणा देता हैं : एल आर शर्मा

शिमला, 30 जनवरी 26 (RHNN) : देश को आजादी दिलाने वाले स्वतंत्रता संग्राम के शहीदों की स्मृति में 30 जनवरी 2026 को 2 मिनट के लिए मौन धारण किया गया । इसे लेकर प्रशासन की ओर से गाइडलाइन भी जारी कर दी गई थी । इसके अलावा सार्वजनिक उपक्रम के साथ-साथ शैक्षणिक संस्थाओं में भी इस आदेश का पालन कराए जाने को कहा गया था।

आदेश में लिखा गया है कि हर साल 30 जनवरी को सुबह 11:00 बजे भारत के स्वतंत्रता संग्राम में अपने जीवन का बलिदान देने वालों के लिए 2 मिनट का मौन रखा जाता है। इस संबंध में पूर्व में भी गाइडलाइन जारी हो चुकी है। 30 जनवरी को 11:00 बजे मौन रखकर काम या गतिविधि रोकी जाना चाहिए। इसके अलावा अगर संभव हो तो 2 मिनट के मौन की अवधि शुरू होने और समाप्त होने पर सूचना के रूप में सायरन का उपयोग किया जाना चाहिए। अगर सायरन ना हो तो अन्य सिग्नल के साथ मौन धारण कराया जाना चाहिए।

शहीद दिवस पर आम लोगों को जोड़ने का भी निर्देश : प्रशासन की ओर से जारी निर्देशों में स्पष्ट रूप से जिक्र किया गया है कि आम जनता को भी शहीदों की स्मृति दिवस से जोड़ा जाना चाहिए। शहीद दिवस को उचित गंभीरता के साथ मनाया जाना चाहिए। इसके लिए हम लोगों का इस ओर ध्यान केंद्रित किया जाना जरूरी है।

शैक्षणिक संस्थाओं के लिए भी आदेश : आदेश में ये भी जिक्र किया गया है कि शहीद दिवस मनाने के संबंध में नियंत्रणाधीन सभी शैक्षणिक संस्थाओं और सार्वजनिक उपक्रम को निर्देश जारी किए जाने चाहिए ताकि पूरा आयोजन गंभीरता के साथ मनाया जा सके। इसके अलावा स्वतंत्रता संग्राम और राष्ट्रीय एकता के बारे में वार्ता, भाषण के माध्यम से जानकारी दी जानी चाहिए।
स्वतंत्रता

संग्राम में अपने प्राणों का बलिदान देने वाले शहीदों की स्मृति में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन शिमला में 30 जनवरी को प्रात:11 बजे दो मिनट का मौन धारण किया गया। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के सूचना अधिकारी, एल आर शर्मा ने बताया कि शहीद दिवस भारत में उन वीरों को श्रद्धांजलि देने के लिए मनाया जाता है, जिन्होंने देश की आजादी और समृद्धि के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया। भारत में शहीद दिवस साल में दो बार मनाया जाता है- पहला, 30 जनवरी और 23 मार्च। इन दोनों दिनों का ऐतिहासिक महत्व है। 30 जनवरी और 23 मार्च को शहीद दिवस मनाना न केवल वीर सपूतों को याद करने का अवसर है, बल्कि यह दिन हमें यह याद दिलाता है कि हमारी आजादी और देश की समृद्धि के लिए कितने लोगों ने अपनी जान गंवाई। ये दिन हमें उनके आदर्शों पर चलने और देश के प्रति अपने कर्तव्यों को निभाने की प्रेरणा देते हैं।

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