शिमला,12 जून 26 (RHNN) : अंतरराष्ट्रीय शिमला समर फेस्टिवल के अंतर्गत आयोजित रंग नत्योत्सव के पांचवे दिन
ध्रुव शिखर शिमला के अंतर्गत प्रवीण चांदला द्वारा निर्देशित सुविख्यात उपन्यासकार मंजुल भगत के उपन्यास अनारो के मंचन से सम्पन्न हुआ।
मंजुल भगत के उपन्यास ‘अनारो’ की नायिका निम्न वर्ग की संघर्षशील स्त्री का प्रतिनिधित्व करती है। उसका पति नंदलाल गैर-जिम्मेदार और परिवार की उपेक्षा करने वाला व्यक्ति है।
इसके बावजूद अनारो घर-घर काम करके अपने बच्चों का पालन-पोषण करती है। गरीबी, अपमान और कठिन परिस्थितियों को सहते हुए भी वह आत्मसम्मान बनाए रखती है तथा बच्चों के उज्ज्वल भविष्य के लिए निरंतर संघर्ष करती है। अपनी बेटी के विवाह की जिम्मेदारी भी वह सफलतापूर्वक निभाती है। अनारो का चरित्र निम्नवर्गीय भारतीय नारी के साहस, धैर्य और संघर्षशीलता का सशक्त प्रतीक है। उपन्यास के मंचन मैं देश काल और पात्रों के निरंतर बदलाव से मंचन प्रवाह की स्वीकार्यता को दर्शकों में यथावत बनाए रखना बहुत बड़ी चुनौति निर्देशक के समक्ष होती है किंतु स्वयं उपन्यास का रूपांतरण कर प्रवीण चांदला ने कहानी की मार्मिकता को अत्यंत प्रभावशाली रूप मैं दर्शकों के सम्मुख परोसा जिससे सहज स्वीकार किया गया।
नाटक की विशेषता ये रही कि बिना मंचीय तामझाम के केवल अभिनय को प्रमुखता देते हुए प्रकाश ,ध्वनि और अभिनेताओं के द्वारा संपूर्ण उपन्यास के कथानक को मंच पर परोसा गया जो सफल प्रयोग रहा । नाटक पूर्णतया भोजपुरी भाषा मैं खेला गया । यद्यपि भाषा कठिन थी तथापी कलाकारों के सघन अभ्यास ने इस परीक्षा को सफलतापूर्वक उत्तीर्ण किया । भाषा की विविधता और अभिनय की प्रधानता इस नाटक का मूल था जिसे दर्शकों ने सहज अंगीकार किया । निर्देशक ने अनारो के चरित्र को तीन भागों मैं विभक्त करते हुए प्रत्यक्ष अनारो (श्रृति रोहटा), आंतरिक भावनारूप अनारो और सूत्रधार अनारो (अनामिका) , के रूप मैं प्रस्तुत किया जो काफी सफल प्रयोग सिद्ध हुआ । अनारों के पति नंद लाल (देवेश शर्मा), भाई राम भरोसे (संजय सूद), बेटी गंजी , पंजाबन बीबी की भूमिका (प्रीति) बाबू व नेपथ्य में मनहर की भूमिका परमेश शर्मा ने निभाई। मंच के पीछे प्रकाश व्यवस्था अशोक नरवाल , ध्वनि एवं संगीत रोहित कँवल , मंच व्यवस्था एवं सज्जा अनिल और राजू ने किया। तनु भारद्वाज और कपिल शर्मा और केदार ठाकुर का सहयोग भी नाट्य प्रदर्शन को अर्थ प्रदान कर गया ।

