शिमला, 14 जुलाई(rhnn) : आज एसएफआई विश्वद्यालय ईकाई द्वारा राज्यपाल महोदय को ज्ञापन सौंपा गया एसएफआई द्वारा छात्र मांगों को लेकर तथा विश्वद्यालय में हो रही धांधलियो के विषय में राज्यपाल के समक्ष ज्ञापन सौंपा। एसएफआई ने बात रखते हुए कहा कि हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय और उससे जुड़े कॉलेजों में छात्र संघ चुनाव को सीधे और तुरंत प्रभाव से शुरू किए जाएं ताकि चुनाव स्वतंत्र, निष्पक्ष, पारदर्शी और नियमित हों। छात्रों के अधिकारों की रक्षा और कैंपस में लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए छात्रों का लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व ज़रूरी है। एसएफआई ने आगे बात रखते हुए कहा कि हिमाचल प्रदेश यूनिवर्सिटी में वित्तीय अनुशासन बनाए रखने और छात्रों पर फीस का बोझ कम करने के लिए प्रो-वाइस-चांसलर के पद को खत्म किया जाए। विश्वविद्यालय में प्रो-वाइस-चांसलर का पद बनने के उपरांत से यूनिवर्सिटी के बजट पर बेवजह वित्तीय बोझ पड़ रहा है। SFI ने इस पद को खत्म करने की मांग करती है ताकि बजट का इस्तेमाल प्रशासनिक विस्तार के बजाय एकेडमिक और इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास के लिए किया जाए।
इसके अलावा एसएफआई ने कहा कि पूर्व वाइस-चांसलर डॉ. सिकंदर कुमार के कार्यकाल में हुई प्रोफेसरों की भर्ती की न्यायिक जांच करवाई जाए । पूर्व वाइस-चांसलर डॉ. सिकंदर कुमार के कार्यकाल में प्रोफेसरों की भर्ती प्रक्रिया में गड़बड़ी के गंभीर आरोप लगे हैं। हाली में कैग की रिपोर्ट ने भी 186 प्रफेसरों की भर्ती पर सवाल उठाए हैं । एकेडमिक सिस्टम में पारदर्शिता और ईमानदारी बनाए रखने के लिए, इन आरोपों की जांच करने और जवाबदेही तय करने के मकसद से एक न्यायिक जांच समिति का गठन किया जाना चाहिए जिससे विश्वविद्यालय प्रोफेसर भर्ती में पारदर्शिता बनी रहे। एसएफआई ने बात रखते हुए कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा गैर-शिक्षण कर्मचारियों की भर्ती की जाए गैर-शिक्षण कर्मचारियों की कमी ने विभिन्न विभागों और प्रशासनिक कार्यालयों के कामकाज पर बुरा असर डाला है। SFI मांग करती है कि शैक्षणिक और प्रशासनिक कामकाज सुचारू रूप से चलाने के लिए गैर-शिक्षण कर्मचारियों की तुरंत भर्ती की जाए।
एसएफआई ने कहा कि हाली में विश्वविद्यालय द्वारा फीस वृद्धि करके छात्रों पर आर्थिक बोझ डालने का काम किया जा रहा है एसएफआई ने कहा कि हिमाचल प्रदेश यूनिवर्सिटी में हाल ही में बढ़ाई गई फीस को वापस लिया जाए यूनिवर्सिटी प्रशासन द्वारा हाल ही में बढ़ाई गई फीसो से छात्रों पर आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के छात्रों पर अनावश्यक आर्थिक बोझ पड़ा है। शिक्षा एक मौलिक अधिकार है और इस तरह की फीस वृद्धि से उच्च शिक्षा तक छात्रों पहुंच सीमित होती जा रही है। SFI बढ़ी हुई फीसों को तुरंत वापस लेने की मांग करती है ,और प्रशासन से आग्रह करती है कि वह वित्तीय मामलों में छात्र-हितैषी रवैया अपनाए। एसएफआई ने राज्यपाल महोदय से निवेदन किया कि इन सभी मुद्दों पर कड़ा संज्ञान लिया जाए और इन सभी समस्याओं को जल्द से जल्द हल किया जाए।

