शिमला, 31 जुलाई (rhnn) : राजधानी शिमला के जाखू स्मृति वन में शुक्रवार को आयोजित पौधरोपण एवं स्वच्छता अभियान के दौरान पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ बंदरों की बढ़ती समस्या के समाधान पर भी जोर दिया गया। इस्कॉन देवभूमि शिमला, वन विभाग तथा पर्यावरण, विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के संयुक्त अभियान में करीब 50 स्वयंसेवकों ने भाग लेकर हॉर्स चेस्टनट और अखरोट के पौधे लगाए तथा परिसर में स्वच्छता अभियान चलाया।
कार्यक्रम में पर्यावरण, विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के सचिव सुशील कुमार सिंगला ने कहा कि अखरोट जैसे फलदार वृक्षों का रोपण केवल हरित आवरण बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह स्थानीय जैव विविधता को समृद्ध करने और बंदरों के आबादी वाले क्षेत्रों में आने की समस्या को कम करने में भी मददगार हो सकता है। उन्होंने कहा कि जंगलों में पर्याप्त प्राकृतिक भोजन उपलब्ध होने से वन्यजीवों का रिहायशी इलाकों की ओर रुख कम होगा।
उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण के लिए धार्मिक एवं सामाजिक संगठनों की भागीदारी बेहद महत्वपूर्ण है और भविष्य में भी ऐसे संयुक्त अभियान जारी रहेंगे। डीएफओ (शहरी) पवन चौहान ने कहा कि जनसहभागिता के बिना शहरी वनों का संरक्षण संभव नहीं है। कार्यक्रम में अतिरिक्त सचिव डॉ. अमित गुलेरिया ने लगाए गए पौधों की नियमित देखभाल का संकल्प दिलाया। अभियान का समापन पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छता के सामूहिक संकल्प के साथ हुआ।

