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भारी बारिश के बावजूद तहबाजारियों के समर्थन में सीपीआई(एम) का डीसी कार्यालय शिमला पर जोरदार प्रदर्शन

शिमला, 01 सितंबर (rhnn) : नगर निगम शिमला द्वारा शहर में लंबे समय से अपनी रोजी-रोटी कमा रहे तहबाजारियों, रेहड़ी-फड़ी वालों और छोटे कारोबारियों को उजाड़ने की कार्रवाई के खिलाफ भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) ने आज भारी बारिश के बावजूद डीसी कार्यालय शिमला के बाहर जोरदार धरना-प्रदर्शन किया। प्रदर्शन में पार्टी कार्यकर्ताओं, तहबाजारियों तथा अन्य जनसंगठनों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया और नगर निगम प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। सीपीआई(एम) ने स्पष्ट किया कि शिमला शहर को सुंदर बनाने के नाम पर गरीबों और मेहनतकशों की आजीविका छीनने की किसी भी कार्रवाई को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। पार्टी ने कहा कि तहबाजारी कोई अपराध नहीं बल्कि हजारों परिवारों की आजीविका का साधन है। वर्षों से शिमला शहर में फल-सब्जियां, कपड़े, रोजमर्रा की वस्तुएं तथा अन्य सामान बेचकर अपना और अपने परिवारों का पालन-पोषण करने वाले तहबाजारियों को अचानक उजाड़ना पूरी तरह अन्यायपूर्ण और अमानवीय है।

धरने को संबोधित करते हुए सीपीआई(एम) नेताओं संजय चौहान, विजेंद्र मेहरा व जगत राम ने कहा कि नगर निगम प्रशासन को तहबाजारियों को समस्या के रूप में देखने के बजाय शहर की अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा मानना चाहिए। तहबाजारी के माध्यम से आम जनता को अपेक्षाकृत सस्ता सामान उपलब्ध होता है और हजारों लोगों को रोजगार मिलता है। ऐसे में बिना वैकल्पिक व्यवस्था किए उन्हें हटाना उनके परिवारों को भुखमरी और बेरोजगारी की ओर धकेलने के समान है। पार्टी ने आरोप लगाया कि नगर निगम द्वारा गरीब मेहनतकश तहबाजारियों के खिलाफ लगातार कार्रवाई की जा रही है। यह दोहरा रवैया स्वीकार नहीं किया जा सकता। सीपीआई(एम) ने मांग की कि तहबाजारियों को उजाड़ने की कार्रवाई तत्काल बंद की जाए तथा सभी प्रभावित तहबाजारियों के साथ बातचीत कर उनकी आजीविका की स्थायी व्यवस्था की जाए। पार्टी ने कहा कि किसी भी तहबाजारी को हटाने से पहले कानून के अनुरूप सर्वेक्षण, पहचान, स्थान निर्धारण और वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित की जानी चाहिए। प्रदर्शनकारियों ने यह भी मांग की कि नगर निगम शिमला तहबाजारी से जुड़े मामलों में पारदर्शिता बरते और तहबाजारी नीति के तहत पात्र लोगों को उचित स्थान उपलब्ध करवाए। जिन तहबाजारियों को लंबे समय से काम करने से रोका जा रहा है, उन्हें तत्काल काम करने का अधिकार दिया जाए। सामान जब्त करने, चालान करने और अन्य दमनात्मक कार्रवाइयों के नाम पर गरीबों को परेशान करना बंद किया जाए।

सीपीआई(एम) ने कहा कि भारी बारिश के बावजूद बड़ी संख्या में लोगों का धरने में डटे रहना इस बात का प्रमाण है कि तहबाजारियों का संघर्ष केवल कुछ लोगों का मुद्दा नहीं बल्कि रोजी-रोटी और आजीविका के अधिकार का सवाल है। पार्टी तहबाजारियों के संघर्ष को व्यापक जन आंदोलन में तब्दील करेगी और नगर निगम प्रशासन की गरीब विरोधी नीतियों के खिलाफ आंदोलन को और तेज किया जाएगा। पार्टी ने जिला प्रशासन से मांग की कि वह नगर निगम प्रशासन के साथ तत्काल बैठक बुलाकर तहबाजारियों की समस्याओं का समाधान करवाए। सीपीआई(एम) ने चेतावनी दी कि यदि तहबाजारियों को उजाड़ने की कार्रवाई बंद नहीं की गई और उनकी मांगों का समाधान नहीं किया गया तो पार्टी तहबाजारियों के साथ मिलकर आगामी दिनों में आंदोलन को और व्यापक करेगी। सीपीआई(एम) ने कहा कि शिमला केवल पर्यटकों, बड़े कारोबारियों और प्रभावशाली लोगों का शहर नहीं है। इसे बनाने और चलाने में मजदूरों, तहबाजारियों, रेहड़ी-फड़ी वालों तथा अन्य मेहनतकश लोगों का भी बराबर योगदान है। इसलिए शिमला के विकास और सौंदर्यीकरण की कीमत गरीबों की रोजी-रोटी छीनकर नहीं चुकाई जा सकती। पार्टी ने दोहराया कि “उजाड़ो नहीं, बसाओ; रोजगार छीनो नहीं, आजीविका की गारंटी दो” के सिद्धांत के आधार पर तहबाजारियों की समस्या का समाधान किया जाना चाहिए। सीपीआई(एम) तहबाजारियों के अधिकारों और सम्मानजनक आजीविका की लड़ाई में उनके साथ मजबूती से खड़ी है।

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