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समग्र शिक्षा की नई पहल: अब प्रयोगों, मॉडलों और गतिविधियों के जरिए विज्ञान सीखेंगे स्कूली बच्चे

शिमला,03 जून 26 (RHNN) : हिमाचल प्रदेश के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों के लिए विज्ञान अब केवल पाठ्यपुस्तकों तक सीमित नहीं रहेगा। वे प्रयोगों, विज्ञान मॉडलों और गतिविधि-आधारित शिक्षण के माध्यम से विज्ञान को स्वयं अनुभव कर सकेंगे। स्कूली बच्चों को विज्ञान की हैंड्स-ऑन और एक्सपीरिएंशियल लर्निंग उपलब्ध कराने की दिशा में समग्र शिक्षा हिमाचल प्रदेश ने एक महत्वपूर्ण पहल की है। इसके तहत समग्र शिक्षा हिमाचल प्रदेश और अगस्त्य इंटरनेशनल फाउंडेशन के बीच एक महत्वपूर्ण समझौता (एमओयू) हस्ताक्षरित किया गया है।
समग्र शिक्षा के निदेशक राजेश शर्मा ने कहा कि इस साझेदारी पर कहा कि यह विद्यार्थियों में विज्ञान के प्रति जिज्ञासा, नवाचार और खोज की भावना को प्रोत्साहित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। उन्होंने कहा कि गतिविधि-आधारित और अनुभवात्मक शिक्षण बच्चों की सीखने की क्षमता को बढ़ाने का प्रभावी माध्यम है। इस सहयोग से प्रदेश के विद्यार्थियों को विज्ञान को समझने और सीखने के नए अवसर प्राप्त होंगे, जिससे उनकी वैज्ञानिक सोच, समस्या-समाधान क्षमता और रचनात्मकता का विकास होगा। उन्होंने कहा कि यह पहल राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के उद्देश्यों के अनुरूप गुणवत्तापूर्ण, नवाचारी और अनुभवात्मक शिक्षा को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है।

अगस्त्य इंटरनेशनल फाउंडेशन देश की अग्रणी संस्थाओं में से एक है, जो गतिविधि-आधारित और अनुभवात्मक शिक्षण के माध्यम से विज्ञान शिक्षा को रोचक, प्रभावी और सहज बनाने के लिए कार्य कर रही है। इस साझेदारी के अंतर्गत प्रदेश के विभिन्न सरकारी स्कूलों में अभिनव विज्ञान शिक्षा कार्यक्रम संचालित किए जाएंगे, जिससे छात्र वैज्ञानिक अवधारणाओं को व्यवहारिक रूप से समझ सकेंगे और उन्हें दैनिक जीवन से जोड़ पाएंगे। स्कूली बच्चों में विज्ञान के प्रति रुचि और जिज्ञासा विकसित करने के लिए फाउंडेशन द्वारा प्रशिक्षित विज्ञान शिक्षकों, जिन्हें ‘इग्नाइटर्स’ कहा जाता है, की तैनाती की जाएगी। ये इग्नाइटर्स कक्षा 6 से 10 तक के विद्यार्थियों के साथ कार्य करेंगे तथा विभिन्न प्रयोगों, गतिविधियों और इंटरैक्टिव विज्ञान मॉडलों के माध्यम से विज्ञान को सरल, रोचक और समझने योग्य बनाएंगे। इससे विद्यार्थियों की विषय के प्रति रुचि बढ़ेगी और वे वैज्ञानिक सिद्धांतों को वास्तविक जीवन से जोड़कर समझ सकेंगे। इग्नाइटर्स केवल विद्यार्थियों के साथ ही नहीं, बल्कि शिक्षकों के साथ भी कार्य करेंगे। वे शिक्षकों को गतिविधि-आधारित शिक्षण पद्धतियों का प्रशिक्षण देंगे तथा कक्षा शिक्षण में इन नवाचारी तरीकों को प्रभावी ढंग से शामिल करने में सहयोग प्रदान करेंगे। इससे शिक्षण प्रक्रिया अधिक सहभागितापूर्ण, रचनात्मक और परिणामोन्मुख बनेगी।

इस पहल के अंतर्गत उपलब्ध कराए जाने वाले सभी विज्ञान मॉडल, प्रयोगात्मक सामग्री, प्रदर्शन गतिविधियां और शैक्षणिक सहयोग पूरी तरह निःशुल्क होंगे। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि विद्यालयों अथवा विद्यार्थियों पर किसी प्रकार का अतिरिक्त वित्तीय भार नहीं पड़ेगा।
साइंस सेंटर और मोबाइल साइंस लैब पहुंचाएंगे विज्ञान को विद्यार्थियों तक अधिक से अधिक विद्यार्थियों तक विज्ञान शिक्षा पहुंचाने के लिए अगस्त्य इंटरनेशनल फाउंडेशन प्रदेश में साइंस सेंटर (Science Centers) स्थापित करेगा तथा मोबाइल साइंस लैब्स का संचालन भी करेगा। इन माध्यमों से दूरदराज और दुर्गम क्षेत्रों के विद्यार्थियों को भी प्रयोग-आधारित विज्ञान शिक्षा का लाभ मिल सकेगा। विद्यार्थी अवलोकन, प्रयोग, खोज और नवाचार के माध्यम से विज्ञान को समझने और सीखने का अवसर प्राप्त करेंगे।

फाउंडेशन द्वारा आयोजित ‘जिज्ञासा’ नामक क्षेत्रीय और राष्ट्रीय स्तर के विज्ञान कार्यक्रमों में भी विद्यार्थियों को भागीदारी का अवसर मिलेगा। यह मंच बच्चों को अपनी रचनात्मकता, नवाचार क्षमता और वैज्ञानिक सोच प्रदर्शित करने का अवसर प्रदान करेगा। साथ ही उन्हें वास्तविक जीवन की समस्याओं के समाधान खोजने और वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करने के लिए प्रेरित करेगा। समग्र शिक्षा और अगस्त्य इंटरनेशनल फाउंडेशन के बीच यह साझेदारी हिमाचल प्रदेश में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को बढ़ावा देने तथा विद्यार्थियों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इसके माध्यम से प्रदेश के हजारों विद्यार्थी और शिक्षक आधुनिक, रोचक तथा अनुभवात्मक विज्ञान शिक्षा से लाभान्वित होंगे।

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