शिमला , 19 दिसंबर 25 (RHNN): सीटू राज्य कमेटी हिमाचल प्रदेश के आह्वान पर मोदी सरकार द्वारा मजदूरों की हितों की रक्षा के लिए बनाये गये 29 श्रम कानूनों को खत्म करके चार श्रम संहिताओं में बदलने और मनरेगा के कानून को बदलने के विरोध में हिमाचल प्रदेश के जिला व ब्लॉक मुख्यालयों पर विशाल प्रदर्शन किए गए जिसमें प्रदेशभर में हजारों मजदूरों ने भाग लिया। शिमला के डीसी ऑफिस में हुए प्रदर्शन में विजेंद्र मेहरा, प्रेम गौतम, जगत राम, अमित कुमार, बालक राम, विवेक कश्यप, प्रताप चौहान, कपिल नेगी, नोख राम, सीता राम, निशा, विद्या, उमा, पंकज शर्मा, अशोक कुमार, ओमप्रकाश, दलविंदर, दर्शन लाल, शब्बू आलम, राकेश रवि, शांति, जानकी, बिमला, रीना, कांता, तरुण, अनिल सहित सैंकड़ों मजदूरों ने भाग लिया।
सीटू प्रदेशाध्यक्ष विजेंद्र मेहरा व महासचिव प्रेम गौतम ने कहा है कि पिछले सौ वर्षों में अनेकों संघर्षों के माध्यम से मजदूरों के अधिकारों की रक्षा के लिए बनाये गये उन्नतीस कानून इसलिए समाप्त किए गए हैं और नयी श्रम संहिताओं को बनाया गया है ताकि उद्योगपतियों, कंपनियों, ठेकेदारों को लूटने और मजदूरों का शोषण करने की आज़ादी मिल सके ।
देश और दुनिया भर के मजदूरों ने लंबी लड़ाई और अनगिनत कुर्बानियों के बल पर आठ घंटे काम करने का अधिकार हासिल किया था जिसे मोदी सरकार ने इन नयी श्रम संहिताओं में बारह घंटे कर दिया है l देश के युवाओं को शोषण के गर्त में धकेलने के लिए स्थाई रोजगार का स्वरूप ही बदल दिया है और उसके स्थान पर निश्चित अवधि के लिए थोड़े समय के लिए रोजगार दिए जाने का प्रावधान इन संहिताओं में कर दिया है l रोजगार की सुरक्षा ही समाप्त कर दी गई है l महिलाओं से रात को भी काम लेने का कानून बनाया गया है जबकि इससे पहले और आज भी पूरी दुनिया में महिलाओं से आवश्यक सेवाओं के अलावा रात को कहीं भी काम नहीं लिया जाता है l इसी तरह से मजदूरों के संगठित होने और अपनी मांगों के लिए आवाज़ उठाने के अधिकार को भी कमजोर किया गया है।
अगर मजदूर हड़ताल पर जाते हैं तो उन्हें जुर्माने और जेल भेजने जैसी सजाओं की व्यवस्था इन नयी श्रम संहिताओं में कर दी गई है l मूलतः इन नयी श्रम संहिताओं को लागू करने का मकसद देश के मजदूर वर्ग को इन नयी श्रम संहिताओं की बेड़ियों में जकड़ कर निहत्था और बंधुआ बनाया जाना है और ये सब व्यापार को आसान करने के नाम पर उद्योगपतियों, कंपनियों ठेकेदारों के मुनाफे को बढ़ाने के लिए किया जा रहा है। सीटू राज्य कमेटी मनरेगा के कानून को खत्म करके नयी योजना में बदलने के मोदी सरकार के फैसले का भी कड़ा विरोध करती है l मनरेगा कानून देश के करोड़ों ग्रामीण मजदूरों जिनमें अधिकतर महिलाएं हैं के लिए जीने का सहारा है उसे भी मोदी सरकार ने अब छीन लिया है l मोदी सरकार 2014 में सत्ता के आने के बाद से ही मनरेगा के कानून को कमजोर करके इसे समाप्त करने की योजना पर काम कर रही थी मनरेगा का मज़ाक उड़ाते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इसे नाकामियों का स्मारक घोषित कर चुके हैं और अब इसे मौका मिलते ही समाप्त कर नयी योजना में बदल दिया है l सीटू इसके खिलाफ चरणबद्ध तरीके से निर्णायक लड़ाई लड़ेगी व प्रस्तावित देशव्यापी हड़ताल को सफल बनाएगी।

