शिमला, 01 मार्च 26 (RHNN) : हिमाचल प्रदेश विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं पर्यावरण परिषद (हिमकॉस्ट) के ईआईएसीपी पीसी हब और स्कूल ऑफ प्लानिंग एंड आर्किटेक्चर (एसपीए), नई दिल्ली के सहयोग से शोघी स्थित सीएसएलसी–विज्ञान संग्रहालय में ‘वहन क्षमता एवं पर्वतीय क्षेत्र नियोजन’ विषय पर दो दिवसीय कार्यशाला आयोजित की गई। इसमें आसपास के विश्वविद्यालयों के सिविल इंजीनियरिंग संकाय के 58 विद्यार्थियों ने भाग लिया।
कार्यशाला का उद्देश्य विद्यार्थियों को वहन क्षमता आकलन, सतत पर्वतीय विकास, पर्यावरण संरक्षण और संवेदनशील पारिस्थितिकी तंत्र में वैज्ञानिक नियोजन की तकनीकी समझ प्रदान करना रहा।
समापन सत्र में हिमकॉस्ट के संयुक्त सदस्य सचिव डॉ. सुरेश सी. अत्री मुख्य अतिथि रहे। उन्होंने कहा कि हिमाचल जैसे पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील क्षेत्रों में विकास प्राकृतिक सीमाओं और संसाधनों के अनुरूप होना चाहिए।
विशेषज्ञ के रूप में प्रो. एम.एस. ठाकुर और डॉ. अरुणाभ पोद्दार ने सुरक्षित निर्माण, आपदा प्रबंधन, जल संसाधन प्रबंधन, ढाल स्थिरता और जिम्मेदार पर्यटन पर विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने अनियोजित निर्माण और संसाधनों पर बढ़ते दबाव को भूस्खलन, जल संकट और पर्यावरणीय क्षरण का कारण बताया। कार्यशाला के अंत में प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र वितरित किए गए। आयोजकों ने इसे प्रदेश में सतत एवं वैज्ञानिक नियोजन को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताया।

