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मौत के बाद भी रोशन होती जिंदगी, 400 मरीजों को मिली नई दृष्टि

शिमला, 31 अगस्त (rhnn) : किसी अपने को खोने का दर्द शब्दों में बयां करना मुश्किल होता है, लेकिन कुछ परिवार ऐसे भी हैं, जिन्होंने इस दुख की घड़ी में लिया फैसला दूसरों की जिंदगी में रोशनी बन गया। आईजीएमसी शिमला में आयोजित नेत्रदान पखवाड़े के सम्मान समारोह में ऐसे ही नेत्रदाताओं के परिजनों को सम्मानित किया गया। उनके प्रियजनों के नेत्रदान से अब तक 400 मरीजों का कॉर्निया प्रत्यारोपण किया जा चुका है। आईजीएमसी के नेत्र रोग विभाग और स्टेट ऑर्गन एंड टिश्यू ट्रांसप्लांट ऑर्गेनाइजेशन हिमाचल प्रदेश की ओर से आयोजित कार्यक्रम में प्रधानाचार्य डॉ. सीता ठाकुर मुख्य अतिथि रहीं। उन्होंने कहा कि नेत्रदान केवल एक सामाजिक सेवा नहीं, बल्कि किसी जरूरतमंद के जीवन में रोशनी लौटाने का माध्यम है। समाज में नेत्रदान और अंगदान को लेकर मौजूद भ्रांतियों को दूर करने के लिए व्यापक जन-जागरूकता जरूरी है।

नेत्र रोग विभागाध्यक्ष डॉ. राम लाल शर्मा ने बताया कि आईजीएमसी का आई बैंक वर्ष 2010 से संचालित है। अब तक 400 कॉर्निया प्रत्यारोपण किए जा चुके हैं। कार्यक्रम में डॉ. विनय ने आई बैंक की गतिविधियों की जानकारी दी। स्वर्गीय उषा, जितेश और उर्मिला देवी के परिजनों को नेत्रदान के लिए सम्मानित किया गया। इसके अलावा डॉ. उषा, नंदिनी, गुरमीत, रुचि, जितेंद्र, डॉ. सारिका और SOTTO के स्टेट ट्रांसप्लांट कोऑर्डिनेटर नरेश को सेवाओं के लिए सम्मानित किया गया।

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