शिमला, 04 सितंबर (rhnn) : पहाड़ों में हो रहे अवैज्ञानिक और अनियोजित विकास के बीच प्रख्यात कथाकार एसआर हरनोट का उपन्यास ‘नदी-रंग जैसी लड़की’ पर्यावरण और मानवीय सरोकारों पर गंभीर सवाल खड़े करता है। इसी उपन्यास पर केंद्रित आलोचना कृति का लोकार्पण शुक्रवार को ऐतिहासिक गेयटी थिएटर में हुआ। न्यू वर्ल्ड पब्लिकेशन से प्रकाशित और डॉ. राजेंद्र बड़गूजर द्वारा संपादित पुस्तक में देशभर के प्रमुख आलोचकों के आलेख शामिल हैं। हिमालय साहित्य संस्कृति एवं पर्यावरण मंच की ओर से आयोजित कार्यक्रम में डॉ. राजेंद्र बड़गूजर, वरिष्ठ कवि-आलोचक राकेशरेणु, पत्रकार एवं साहित्य मीमांसक जय प्रकाश पांडेय और प्रकाशक एमएम चंद्रा ने कृति का लोकार्पण किया। लेखक एसआर हरनोट सहित डॉ. हेमराज कौशिक, प्रो. मीनाक्षी एफ. पॉल, जगदीश बाली, डॉ. प्रशांत रमण रवि, अभिषेक तिवारी और डॉ. दिनेश शर्मा भी मौजूद रहे। विमर्श में वक्ताओं ने कहा कि उपन्यास में नदी, स्त्री, पहाड़ी लोकजीवन और पर्यावरण संकट को एक-दूसरे से जोड़कर देखा गया है। राकेशरेणु और जय प्रकाश पांडेय ने शिमला समेत हिमाचल में बढ़ते प्रदूषण पर चिंता जताते हुए पेट्रोल-डीजल वाहनों की जगह इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने की मांग उठाई।
डॉ. मीनाक्षी एफ. पॉल ने बताया कि वह उपन्यास का अंग्रेजी अनुवाद कर रही हैं। कार्यक्रम में जानकारी दी गई कि 2022 में प्रकाशित उपन्यास के तीन संस्करण आ चुके हैं, यह बीदर यूनिवर्सिटी के पाठ्यक्रम में शामिल है और विभिन्न विश्वविद्यालयों में इस पर शोध हो रहा है। इसका मलयालम अनुवाद भी प्रकाशित हो चुका है। सभागार लेखकों, विद्यार्थियों और साहित्यप्रेमियों से भरा रहा। ने विकास के मॉडल पर उठाए सवाल । पहाड़ों में हो रहे अवैज्ञानिक और अनियोजित विकास के बीच प्रख्यात कथाकार एसआर हरनोट का उपन्यास ‘नदी-रंग जैसी लड़की’ पर्यावरण और मानवीय सरोकारों पर गंभीर सवाल खड़े करता है। इसी उपन्यास पर केंद्रित आलोचना कृति का लोकार्पण शुक्रवार को ऐतिहासिक गेयटी थिएटर में हुआ। न्यू वर्ल्ड पब्लिकेशन से प्रकाशित और डॉ. राजेंद्र बड़गूजर द्वारा संपादित पुस्तक में देशभर के प्रमुख आलोचकों के आलेख शामिल हैं। हिमालय साहित्य संस्कृति एवं पर्यावरण मंच की ओर से आयोजित कार्यक्रम में डॉ. राजेंद्र बड़गूजर, वरिष्ठ कवि-आलोचक राकेशरेणु, पत्रकार एवं साहित्य मीमांसक जय प्रकाश पांडेय और प्रकाशक एमएम चंद्रा ने कृति का लोकार्पण किया। लेखक एसआर हरनोट सहित डॉ. हेमराज कौशिक, प्रो. मीनाक्षी एफ. पॉल, जगदीश बाली, डॉ. प्रशांत रमण रवि, अभिषेक तिवारी और डॉ. दिनेश शर्मा भी मौजूद रहे।
विमर्श में वक्ताओं ने कहा कि उपन्यास में नदी, स्त्री, पहाड़ी लोकजीवन और पर्यावरण संकट को एक-दूसरे से जोड़कर देखा गया है। राकेशरेणु और जय प्रकाश पांडेय ने शिमला समेत हिमाचल में बढ़ते प्रदूषण पर चिंता जताते हुए पेट्रोल-डीजल वाहनों की जगह इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने की मांग उठाई। डॉ. मीनाक्षी एफ. पॉल ने बताया कि वह उपन्यास का अंग्रेजी अनुवाद कर रही हैं। कार्यक्रम में जानकारी दी गई कि 2022 में प्रकाशित उपन्यास के तीन संस्करण आ चुके हैं, यह बीदर यूनिवर्सिटी के पाठ्यक्रम में शामिल है और विभिन्न विश्वविद्यालयों में इस पर शोध हो रहा है। इसका मलयालम अनुवाद भी प्रकाशित हो चुका है। सभागार लेखकों, विद्यार्थियों और साहित्यप्रेमियों से भरा रहा।

